नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) होंगे जो लंबे समय से रुके हुए थे। उम्मीद है कि चुनाव के नतीजों से निकाय की निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति का काय परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया में तेजी क
12 वार्ड समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों के लिए भी मतदान होगा। More information (भाजपा) और विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। परिणाम दिन में बाद में घोषित किए जाने की उम्मीद है।
18 सदस्यों वाली एक समिति है जो , ठेकों, नीतिगत मामलों और नगर निगम की परियोजनाओं को मंजूरी देती है। छह खाली सीट पर चुनाव लंबित रहने के कारण मार्च से यह समिति केवल 12 minutes रही है।
चुनाव मूल रूप से तीन जून को होने थे लेकिन इन्हें टाल दिया गया था और बाद में इसे पुनर्निर्धारित कर चुनाव के लिए 15 min तारीख तय की गई।
” हुए गुट ‘इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 16 years 16 years 250 मजबूत हो गई है। अब भाजपा के पास 139 पार्षद हैं, जबकि आप की संख्या घटकर 102 रह गई है।
संख्या में बदलाव के बाद स्थायी समिति के चुनाव में भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा है लेकिन कई वार्ड समिति के मुकाबलों में आ टक्कर होने की उम्मीद है।
स्थायी समिति की छह सीट के लिए नरेला में भाजपा के पवन कुमार का मुकाबला आप की रितु मुकेश कुमार से है, जबकि पश्चिमी क्षेत्र में भाजपा के शशि यादव का सामना आप के सुदेश कुमार से होगा। शाहदरा दक्षिण में भाजपा की मुनेश का मुकाबला आप की बीना से है।
More information से सुशील और मध्य जोन से हेम चंद गोयल को नामांकित किया है।
12 वार्ड समितियों में से आठ में स्पष्ट बहुमत है जबकि आप चार में आगे है। हालांकि कुछ समितियों में खासकर सिटी एसपी, रोहिणी, मध्य और दक्षिण जोन में नतीजा कांग्रेस पार्षदों के वोट पर निर्भर कर सकता है।
एमसीडी में कांग्रेस के सिर्फ नौ पार्षत हो सकते हैं जहां जीत-हार का अंतर कम रहने की उम्मीद है।
कांग्रेस के वार्ड पार्षदों ने कहा कि पार्टी एक संगठन के तौर पर इस मुकाबले से दूर रहेगी।
जाकिर नगर की पार्षद नाजिया दानिश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हमारे पास जोन में जरूरी संख्या नहीं है। हमारा किसी भी पक्ष का समर्थन करने का कोई इरादा नहीं है। अगर कोई पार्षद वोट देता है, तो यह उसका अपना फैसला होगा।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भाजपा और अ कामकाज और विचारधारा के खिलाफ है इसलिए चुनाव में वह किसी भी पार्टी का सामूहिक रूप से समर्थन नहीं करेगी।
भाषा सुरभि मनीषा नरेश
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