धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर एम्पलाई चाहता है कि करियर में उसे खूब तरक्की मिले। चाणक्य नीति में कुछे ऐसे सिद्धांत बताए गए हैं, जो पेशेवर विकास और व्यक्तित्व के निखार के लिए महत्वपूर्ण हैं। आज हम आपको चाणक्य नीति के कुछ ऐसे ही श्लोक बताने जा रहे हैं, जो कॉर्पोरेट एम्पलाई होने के नाते आपके बहुत काम आ सकते हैं।
श्लोक 1 – “नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
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इस श्लोक में कहा गया है कि किसी व्यक्ति बहुत सीधा या भोला नहीं होना चाहिए। इसका उदहारण देते हुए चाणक्य कहते हैं कि जंगल में सीधे पेड़ों को सबसे पहले काटा जाता है और टेढ़े-मेढ़े पेड़ बच जाते हैं। ठीक इसी तरह सीधे लोगों का फायदा सबसे पहले उठाया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपने कार्येक्षेत्र में होशियारी से काम करें।
“” न च लोभतः।
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इस श्लोक के अनुसार, किसी भी काम को प्रेम, नफरत, लालच या फिर भ्रम मोह में आकर नहीं करना चाहिए। बल्कि उसे केवल कर्तव्य समझकर वैसे ही करना चाहिए जैसा वह वास्तव में करने लायक है। ऐसे य तो इस बात को जरूर ध्यान में रखें।
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श्लोक 3 – यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते निर्घषणच्छेदन तापताडनैः।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा॥
इस श्लोक में कहा गया है कि जिस प्रकार सोने को परखने के लिए उसे घिसा, काटा, तपाया और पीटा जाता है, उसी तरह इन चार कसौटियों पर व्यक्ति के चरित्र और योग्यता की भी जांच होती है। इसलिए कार्यक्षेत्र में आने वाली इस तरह की चुनौतियों से ठ करें।
Chapter 4 – ” काञ्चनम्।
नीचादप्युत्तमां विद्यां स्तनं “
आचार्य चाणक्य इस श्लोक में बताते हैं कि जहरीली चीज से अगर अमृत मिले तो ले लेना चाहिए या फिर गंदगी में गिरा हो तो उठा लेना चाहिए। ठीक इसी तरह ज्ञान जहां से भी मिले, ले लेना चाहिए। क्योंकि मूल्यवान वस्तु की कीमत उसकी जगह से कम नहीं होती।
Chapter 5 च पक्षिणी।
शिशुं पालयते नित्यं तथा सज्जनसंगतिः ।।
चाणक्य नीति का यह श्लोक सज्जन लोगों की संगति के महत्व को दर्शाता है। इस श्लोक का अर्थ है कि मछली, कछुआ और पक्षी अपने बच्चों का पालन-पोषण क्रमशः देखकर, ध्यान और स्पर्श से करते हैं, ठीक उसी तरह सज्जन लोगों की संगति में रहने वाला व्यक्ति भी इन तीन तरीकों को अपनाकर अपने आप को विकसित करता है और अपने व्यक्तित्व में निखार लाता है।
