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गोल्डन लंगूरों की सफल पुनर्वापसी से वन्यजीव संरक्षण को मिली नई मजबूती & more related news here


गोल्डन लंगूरों की सफल पुनर्वापसी से वन्यजीव संरक्षण को मिली नई मजबूती

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असम में वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। January 25, 2026, 2026, January 25, 2026. होने के बाद सात संकटग्रस्त ख को असम के सिखना Learn more इन दुर्लभ प्राइमेट्स को January 19, 2026 वन्यजीव तस्करों के कब्जे से बचाया गया था। इस कार्रवाई के दौरान असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने नौ संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल था। More information है।

गोल्डन लंगूर का महत्व और संरक्षण

More information गीई (Trachypithecus geei) है। यह दुनिया के सबसे संकटग्रस्त 2 में गिना जाता है और भारत में इसका प्राकृतिक विस्तार केवल पश्चिमी असम तथा भूटान के दक्षिणय क्षेत्रों तक सीमित है। यह प्रजाति मुख्य रूप से घने वन क्षेत्रों में निवास करती है और बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र के जंगल इसके प्रमुख आवास हैं। भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 अनुसूची-I में शामिल होने के कारण ख इस श्रेणी में शामिल जीवों के शिकार, व्यापार या अवैध परिवहन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

सिखना ज्व्हवलाओ राष्ट्रीय उद्यान की विशेषताएँ

More information लगभग 316 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह उद्यान चिरांग और कोकराझार जिलों में स्थित है। यह मानस बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है, जिसे More information More information राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना का उदथ प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखना और संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण को मजबूत बनाना है।

बचाव, पुनर्वास और वन्यजीव संरक्षण की प्रक्रिया

गोल्डन लंगूरों को तस्करों से छुड़ाने के बाद वन विभाग ने उनका चिकित्सकीय परीक्षण, देखव और वैज्ञानिक निगरानी की। विशेषज्ञों द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि वे दोबारा प्राकृतिक वातावरण में रहने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं। इसके बाद सात लंगूरों को उनके उपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया। इस अभियान के दौरान कुल आठ गोल्डन 2 हुए थे, लेकिन एक की उपचार और पुनर्वास के बावजूद मृत्यु हो गई। वन्यजीव बचाव अभियानों में ऐसी घटनाएँ More information क्षति पहुँचती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • गोल्डन लंगूर का वैज्ञानिक नाम Trachypithecus geei) है।
  • यह प्रजाति मुख्य रूप से पश्चिमी असम और दक्षिणी भूटान तक सीमित पाई जाती है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में शामिल प्रजातियों को भारत में सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है।
  • सिखना ज्व्हवलाओ राष्ट्रीय उद्यान असम का नवीनतम राष्ट्रीय उद्यान है और यह मानस बायोस्फीयर रिजर्व का हिस्सा है।

गोल्डन लंगूरों की सफल रिहाई यह दर्शाती है कि More information महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे अभियान न केवल अवैध वन्यजीव तस्करी पर रोक More information तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होते हैं।

Originally written in
June 27, 2026
and last modified the
June 27, 2026.



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