चिंताजनक:अपराध की राह पर बचपन, राजधानी में दुष्कर्म में लिप्त नाबालिगों की संख्या में 121.21% की बढ़ोतरी – Worrying: 121.21% increase in the number of minors involved in crimes in the capital & more related news here

चिंताजनक:अपराध की राह पर बचपन, राजधानी में दुष्कर्म में लिप्त नाबालिगों की संख्या में 121.21% की बढ़ोतरी – Worrying: 121.21% increase in the number of minors involved in crimes in the capital

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कभी स्कूल की घंटी और खेल के मैदान से पहचाना जाने वाला बचपन अब अपराध के आंकड़ों में दर्ज हो रहा है। राजधानी दिल्ली में नाबालिख 121.21 , बल्कि पूरे समाज के लिए गहरी चिंता का संकेत है। 2024 में दुष्कर्म करने के आरोप में 66 2025 ये आंकड़ा 146 तक पहुंच गया। सभी तरह के अपराधों में नाबालिगों के शामिल होने की संख्या में 21.67 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

आंकड़ा बताता है कि बच्चों का एक हिस्सा किस More information में छोड़ आए हैं। कोई ऐसा दिन नहीं जाता है, जिस दिन अखबार में बाल अपराध से जुड़ी खबर न होती हो। इस विषय में दिल्ली पुलिस, सरकार और बच्चों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहे एनजीओ को गंभीरता से सोचना और काम करना होगा।

दिल्ली पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए ये आंकड़े भारतीय आचार संहिता (बीएनएस) व आईपीसी के तहत दर्ज मामलों का है। दिल्ली पुलिस एक्ट के मामलों में कुल अपराध में 17.22 फीसदी का इजाफा हुआ है। बीएनएस और के तहत जहां वर्ष 2999 नाबालिग पकड़े गए थे, 2025 में पकड़े गए नाबालिगों की संख्या 3649 हो गई। कुल अपराध में 2024 में 3270 नाबालिग पकड़े गए थे, जबकि वर्ष 2025 में ये आंकड़ा 3833 तक पहुंच गया।

क्यों भटक रहे हैं नाबालिग

2025 में दिल्ली में नाभ अचानक सुर्खियों में आ गए हैं। बढ़ते अपराधों ने पुलिस को सतर्क कर दिया है। दिल्ली में कई जिला पुलिस नाबालिगों को अपराध से दूर करने के लिए कार्यक्रम चला रही हैं। इसमें एनजीओ, मनोचिकित्सक की सहायता ली जा रही है। नाबालिगों को अपराध की दुनिया से निकाल कर रोजगार में लगवाया जा रहा है।

घर और स्कूल का छूटता नियंत्रण

कई बच्चे स्कूल बीच में छोड़ देते हैं और घर पर उनकी सही निगरानी नहीं हो पाती। माता-पिता के व्यस्त जीवन और टूटती पारिवारिक संरचना का असर बच्चों के व्यवहार पर साफ दिखने लगा है। गलत संगत में पठ नहीं होता।

सोशल मीडिया… प्रभाव

इंटरनेट और सोशल मीडिया ने कम उम्र के बच्चों को एक ऐसी दुनिया दे दी है, जहां लोकप्रियता और स्टाइल की होड़ चलती रहती है। हथियार दिखाने वाले वीडियो, गैंगस्टर जैसे रील, और ‘हीरो’ बनने की चाह उन्हें गलत दिशा में धकेलने लगी है।बच्चों को यह समझ ही नहीं आता कि मनोरंजन के नाम पर देखा गया कंटेंट वास्तक दुनिया में क्या असर डाल सकता है।

नशा, गैंग और अपराध की राह

दिल्ली में सक्रिय कई अपराधी गिरोह अब नाबालिगों को अपने साथ जोड़ने लगे हैं। उन्हें पैसों या नशे का लालच दिया जाता है और फिर छोटे-बड़े अपराध करवाए जाते हैं। गैंगस्टर जानते हैं कि नाबालिगों को कानून के तहत कम सजा मिलती है, इसलिए वे जोखिम भरे काम इन्हीं से करवाते हैं। बाइक चलाने वाले किशोर इन गिरोहों के सबसे आसान शिकार बन जाते हैं।

टूटते संयुक्त परिवार और बढ़ता अकेलापन

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त परिवारों के बिखरने से बच्चों का भावनात्मक संतुलन कमजोर हुआ है। बड़े-बुजुर्गों की सीख, भाई-बहनों का सहारा और परिवार की सामूहिक देखभाल ने बच्चों को हमेशा सुरक्षित रखा था। अब बच्चों के पास न तो सही मार्गदर्शन है और न ही वह माहौल, जो उन्हें गलत कामों से दूर रख सके।

इंटरनेट कंटेंट और किशोरावस्था की जिज्ञासा

किशोर उम्र में आकर्षण और जिज्ञासा स्वाभाविक है, लेकिन मोबाइल और सोशल मीडिया पर के दिमाग पर गहरा प्रभाव डालती है। वे संबंधों, सफलता और प्रसिद्धि को बहुत हल्के में समझने लगते हैं और साथियों को प्रभावित करने के लिए गलत फैसले ले बैठते हैं।

दिल्ली पुलिस नाबालिगों को अपराध की दुनिया से निकालने के लिए कई कदम उठा रही है। पुलिस के साथ ही साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि इन्हें गलत मार्ग पर जाने से रोका जाए। दिल्ली पुलिस अपनी ओर से नाबालिगों के लिए रूरल प्रतियोगिता, एंट्री ड्रग्स क्लब, युवा कार्यक्रम, प्रहरी क्लब के साथ ही बस्तियों में जाकर संपर्क भी करती है। एनजीओ, मनोचिकित्सक और शिक्षकों की सहायता भी ली जाती है।

-देवेश चंद्र श्रीवास्तव, विशेष पुलिस आयुक्त(अपराध शाखा) दिल्ली पुलिस



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