डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मी के मौसम ने दस्तक दे दी है। मौसम करवटें ले रहा है। बारिश हो रही है। तेज हवा के चलते आम के बौर झड़ रहे हैं। आम के बगीचों के मालिक नुकसान की बात कह रहे हैं। मगर बाजार में पके आम की खेप आने लगी है। ऐसे में आम खाने के शौकीनों को सतर्क रहना होगा। कारण, यह मौसम का नहीं केमिकल का कमाल है। यही नहीं केले और पपीते का भी कुछ यही हाल है।
बाजार में बिक रहे चमचमाते आम
हर मौसम का एक फल होता है। मौसम के अनुसार, फल की आवक होने पर उसका दाम संतुलित रहता हे। मगर मुनाफाखोर उसी फल को समय से पहले बाजार में लाकर दो से तीन गुनी कमाई करते हैं। आम के साथ भी यही हो रहा है।
बाजार में आम ठेलों पर दिखने लगे हैं। मगर उनकी चमक बनावटी है। उनमें कोई सुगंध नहीं हैं। आंखों के करीब आने उसे लाने पर जलन सी महसूस होती है। केमिकल से पकाये गए इन आमों को खाकर जाने अंजाने में लोग बीमारी के करीब जा रहे हैं।
What’s wrong with you?
दरअसल, कई व्यापारी कैल्शियम कार्बाइड जैसे खतरनाक रसायनों की मदद से आमों को कुदरत के तय किए गए समय से पहले पका देते हैं। मगर ये फल अंदर से कच्चे और जहरीले रहते हैं।
कई पीढ़ियों से आम के बाग का काम करने वाले गणेश पाल कहते हैं कि कार्बाइड से पकाये गए आम मुनाफा भले ही ज्यादा दे देते हैं लेकिन यह लोगों को बीमार बना सकता है। उन्होंने बताया कि केमिकल से तैयार आम का रंग एक समान चमकीला पीला होता है।
More information है। वहीं, प्राकृतिक रूप से पके आम में हरा-पीला रंग का मिश्रण होता है। उसकी खुशबू ही उसकी गुणवत्ता बता देती है।
केले और पपीते के साथ भी केमिकल का ‘खेल’
गणेश केले के बारहमासी व्यापार के बारे में भी बताते हैं कि बाजार में जगह-जगह मिल रहे केले भी केमिकल की मदद से तैयार किये जाते हैं। गोदामों में किसी फैक्ट्री की तर्ज पर कच्चे केले को पकाकर पीला करने का काम किया जाता है।
यह केले मात्र 24 से 36 घंटे के अंदर पक जाते हैं। वे बाजार में हाथों हाथ खरीदे जाते हैं। मगर इन केलों की परख होती है रेफ्रीजरेटर में रखने पर।
ऐसे केले फ्रीज में रखने के बाद एक ही रात में काले पड़ जाते हैं। वहीं, पपीता का फल भी कार्बाइड की मदद से समय से पहले पकाकर बाजार में बड़ी संख्या में बेचा जाता है। लोग अंजाने में लीवर की सुरक्षा के लिए खाये जाने वाले पपीते से ही लीवर को बीमार कर रहे हैं।
केमिकल से फल कैसे पकाते हैं?
व्यापारी गणेश बताते हैं कि कच्चे आमों को कैल्शियम कार्बाइड के छोटे टुकड़ों के बीच बंद करके रखा जाता है। नमी के संपर्क में आते ही यह तेज रसायन एसिटिलीन गैस छोड़ता है, जो फलों को तेजी से पकाने का काम करता है।
घर पर आसान टेस्ट क्या है?
- प्राकृतिक रूप से पके आम पानी में डूब जाते हैं। केमिकल वाले अक्सर तैरते रहते हैं। कागज पर रगड़ने पर काला दाग बने तो वह आम नकली है।
- आंखों के सामने लाने पर अगर काले दानों से सड़े, जले हुए या रसायन की गंध आए तो उसे न खाएं।
- चावल के दानों से रगड़ने पर अगर काले निशान पड़ जाएं तो कार्बाइड से पके होने की पुष्टि हो जाती है।
ऐसे क्या खतरा है?
वहीं, ऐसे फलों को खाने से होने वाले नुकसान के बारे में डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव बताते हैं कि केमिकल से तैयार किये गए आम खाने से लिवर और किडनी को नुकसान हो सकता है। डॉ. के अनुसार, पेटदर्द, उल्टी और त्वचा में जलन हो सकती है। लंबे समय तक खाने से लीवर, किडनी पर बुरा असर पड़ता है और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
What’s wrong with you?
पहले तो प्रयास करें कि ऐसे आम से दूर रहेंगे। यदि खरीदने का मन हो चुका है तो विश्वसनु दुकान से ही खरीदें। फल को बेकिंग सोडा मिले पानी में 10 से 15 य भिगोकर रखने के बाद खाएं। दरअसल, सोडा मिलाने और बाहरी रसायनों का असर कम हो जाता है।
