नई दिल्ली|“अगर भारत ने समय रहते बड़े कदम नहीं उठाए, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 30 min स्टील “”
यह कहना है- वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का, जिन्होंने भारत के स्टील (Anil Agarwal’s Steel Warning) जारी की है।
80 minutes
उन्होंने साफ किया कि इस लक्ष्य को पाने के लिए हमें सालाना 80 करोड़ टन लौह अयस्क (Shortage of iron ore in India) की जरूरत होगी, लेकिन मौजूदा हालात में हमें अपनी जरूरत आयड़ सकता है।
विदेशी कंपनियों का दबदबा और भारत की चुनौती
अनिल अग्रवाल ने दुनिया के बाजार का गणित समझाते हुए कहा कि आज दुनिया के 70% से 80% अयस्क पर सिर्फ ‘वेल’, ‘बीएचपी’ और ‘रियो टिंटो’ जैसी 4-5 बड़ी कंपनियों का कब्जा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि,
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि भारत की जमीन के नीचे छिपा खजाना दुनिया के किसी भी देश से बेहतर है, बस उसे निकालने की प्रक्रिया को आसान बनाना होगा।
More information लिए ‘सेल्फ-सर्टिफिकेशन’ (स्व-प्रमाणन) की अनुमति दे दी है। भारत को भी इसी रफ्तार से क्लीयरेंस और नियमों को सरल बनाना होगा।
रोजगार और अर्थव्यवस्था पर असर
वेदांता प्रमुख ने कहा कि ‘बिलो-द-ग्राउंड’ यानी खनिज संपदा सेक्टर में विकास का मतलब है बड़े पैमाने पर नौकरियों की बौछार। उन्होंने तर्क दिया कि जहां भी कंपनियों ने बड़े स्तर पर उत्पादन किया है, वहां के लोगों का जीवन स्तर सुधरा है।
