Time Room

रंग-गुलाल संग गीतों का धमाल & more related news here

रंग-गुलाल संग गीतों का धमाल

 & more related news here


समय-समय पर होली को लेकर बॉलीवुड में सैकड़ों गीत बने हैं। होली के लिए फिल्मी गीत, रसिया, लोकगीत, फाग,नौटंकी,भजन इतने हैं कि सुनते ही रहो। More information

हमारे समाज में सदियों से होली रंग खेलने, परस्पर गिहा है। होली अर्थात मस्तों की मस्ती। वहीं बॉलीवुड में तो यह रंगीन फिल्मी गीतों की विरासत ही बन गई है। होली के लिए फिल्मी गीत, रसिया, लोकगीत, फाग,नौटंकी,भजन इतने हैं कि सुनते ही रहो। फिल्मों ने होली को पूरी तरह ग्लैमरस बना दिया है। सफेद साड़ी, कुर्ता-पाजामा इसकी पहचान बन गए हैं। mino तो बस मन करता है कि ‘राजपूत’ फिल्म का हेमा, धर्मेन्द्र, राजेश-विनोद खन्ना पर फिल्माया गीत- ‘भागी रे भागी बृजबाला, कान्हा ने पकड़ा रंग डाला’, गा ही डालें। और कभी-कभी मस्तों की टोली कहीं नाच उठती है जैसे वह नवरंग फिल्म का गीत ख रे हट नटखट ना छू रे मेरा घूंघट,पलट के दूंगी आज तुझे गाली रे…..’।

रंगों में रंग मिल जाते हैं …

होली पर मस्ती बहुत होती है। खलनायक गब्बर सिंह शोले में जब पूछता है कि कब है होली तो लगता है कि पूरी दुनिया पूछ रही है ‘ दिन दिल खिल जाते हैं,रंगों में रंग मिल जाते हैं’। ‘ पत्थर’ के गीत- ‘लाई है हजारों रंग होली, कोई तन के लिए कोई मन के लिए ..’ भेद ही खोल देता है। और रही सही कसर पूरी होती है फिल्म मस्ताना के गीत- ‘होली खेलें नंदलाल, बिरज में धूम मची है’, से। विनोद खन्ना और पद्मिनी की जो मस्ती इस गीत में है वह आज भी गांव-शहर में टोलियों के बीच होती है।

रंग बरसे भीगे चुनर वाली…

होली को लेकर बॉलीवुड भ लेकिन जो बात ‘डॉन’, ‘सिलसिला’ तथा ‘आप की कसम’ मूवी की है उसका जबाव नहीं। डॉन का गीत- ‘अरे, भांग का रंग जमा हो चकाचक,फिर लो पान चबाए,अरे अइसा झटका लगे जिया पे पुनर ” बजता ही है। ठीक इसी तरह से सिलसिला में जब अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया गीत बजता है- ‘रंग बरसे भीगे ” जैसे खो जाता है। ‘ ‘ पूरी मस्ती में है। ऐसे सभी गीत सामाजिक सौहार्द बिखेरते नजर आते हैं।

बलम पिचकारी जो तूने…

” दीपिका पादुकोण ने यूथ को बता दिया है कि होली ऐसे मनाई जाती है। आज कार्पोरेट जगत की होली और जेन जी की होली में इस तरह की मस्ती आम बात है। तब युवक-युवती का भेद मिट जाता है जब वे मिलकर गाते हैं- ‘बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी,तो बोले रे जमाना खराबी हो गयी .. ‘। हर प्रकार के रस-छंद और अलंकारों से भरे इस गीत को बजाते हुए हर कोई एक-दूसरे के गले लगकर मन के मैल मिटाने को तैयार रहता है। शायद इसीलिए कहा गया है कि होली तो मन के मैल हटाकर गले मिलने का रंग महोत्सव है।

आज बिरज में होरी रे…

जब होली की मस्ती और सामाजिक सौहार्द की बात आती है तो बृजमंडल की होली सबसे ऊपर रहती है। यहां के रसिया और भजन तो देश-दुनिया में प्रसिद्ध हैं। ‘आज बिरज में होरी रे रसिया, होरी रे होरी रे ” ” – ये द्ति सॉन्ग की तरह हो गए हैं।

जोगी जी धीरे-धीरे…

जब बात गीतों से सामाजिक सौहार्द की हो तो फगुआ को कैसे भुलाया जा सकता है। फगुआ अल्हड़ मस्ती को प्रजेंट करते हैं। उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड,बिहार, राजस्थान में इनका अधिक प्रचलन है। इसमें प्रभु की भक्ति के साथ ही ग्रामीण जीवन मेँ होता है। फिल्म नदिया के पार में ‘जोगी जी धीरे-धीरे, जोगी जी धीरे-धीरे ..’ सर्वाधिक लोकप्रिय है। -इ.रि.सें.



Source link

Exit mobile version