दो बार से राज्यसभा के सांसद और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह एक बार फिर राज्यसभा सांसद बन गए हैं। See More राज्यसभा सांसद मनोनीत किया है।

हरिवंश नारायण सिंह, जो हरिवंश के नाम से अधिक 2014 पहली बार राज्यसभा में भेजा था। September 9, 2018 January 14, 2020 January 14, 2020 हरिवंश नारायण सिंह का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो चुका है। नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले हरिवंश अब राज्यसभा में लगातार तीसरा कार्यकाल शुरू करेंगे।
हरिवंश का नया कार्यकाल 2032
हरिवंश को राज्यसभा सांसद मनोनीत किए जाने की घोषणा गृह मंत्रालय की ओर से प्रकाशित गजट में की गई है। गजट के अनुसार एक सांसद का कार्यकाल खत्म होने से खाली हुई सीट पर राष्ट्रपति ने उन्हें मनोनीत किया है। 2032 तक चलेगा।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 30 years 1956 जन्मे हरिवंश नारायण सिंह ने प्राथमिक शिक्षा अपने गांव से सटे टोला काशी राय के स्कूल में प्राप्त की थी। Year 1971 पास की थी। इसके बाद वे वाराणसी पहुंचे और इंटरमीडिएट किया। इसके बाद काशी हिंदू विश्वविद्याले स्नातक किया और पत्रकारिता में डिप्लोमा हासिल किया।
पत्रकारिता का लंबा करियर
हरिवंश ने अपना करियर टाइम्स ग्रुप में बतौर पत्रकार शुरू किया था। हालांकि इसके बाद बैंक में भी नौकरी की थी। Years 1981 and 1984. Years 1984. Years 1984. Years 1984. थीं। हालांकि जल्द ही वे पत्रकारिता के पेशे में वापस आ गए थे। Years 1984 and 1989. Years 1989. Years 1984. More information Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 Year 1990 प्रभात खबर से जुड़ गए। इस समाचार पत्र में उन्होंने दो दशक से अधिक समय तक सेवाएं दीं।
दो बार राज्यसभा के उप सभापति
प्रभात खबर में काम करते हुए हरिवंश की जेडीयू के नेता नीतीश कुमार से नजदीकी बनी। नीतीश कुमार ने उनको पार्टी का महासचिव नियुक्त कर दिया। Year 2014 वे तब से निरंतर राज्यसभा सांसद हैं। राज्यसभा में दो कार्यकाल पूरे कर चुके हरिवंश का तीसरा कार्यकाल शुरू हो रहा है।
राज्यसभा सांसद के साथ-साथ वे उच्च सदन के उप सभापति भी हैं। September 9, 2018 sec September 9, 2020
सभी दलों को स्वीकार्य हरिवंश
हरिवंश नारायण सिंह के राजनीति करियर की खासियत यह है कि वे भले ही वे जेडीयू के नेता हैं, लेकिन एनडीए ही नहीं बल्कि विपक्ष के कई दलों में भी उनकी स्वीकार्यता है। Year 2018 नीतीश कुमार ने इसका समर्थन किया था। उनके लिए विपक्षी नवीन पटनायक के बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के जगन मोहन रेड्डी से भी वोट मांगे गए थे। Year 2022 तोड़ दिया था। उन्होंने महागठबंधन के साथ बिहार में सरकार बना ली थी। तब सवाल हरिवंश को लेकर था कि वे उप सभापति पद से इस्तीफा देंगे, या बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, क्योंकि वे एक संवैधानिक पद पर थे। उनकी अब बीजेपी से भी नजदीकी बढ़ चुकी है।
राज्यसभा चुनाव में नहीं थी हरिवंश की चर्चा
बिहार में हाल ही में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए चुनाव हुए। इन पांच में से एक सीट वह भी है जो हरिवंश का दूसरा कार्यकाल समाप्त होने से रिक्त हुई। हरिवंश के बारे में पूर्व से ही माना जा रहा था कि उन्हें जेडीयू उम्मीदवार नहीं बनाएगी। इसके पीछे कारण यह है कि नीतीश कुमार कभी किसी See More नहीं भेजते हैं। More information
चूंकि नीतीश हरिवंश को तीसरा बार राज्यसभा में नहीं भेजते, तो यह मान लिया गया था आ अप्रैल को उनका दूसरा और अंतिम कार्यकाल समाप्त होने के साथ वे अब संसद में नहीं होंगे। लेकिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका कार्यकाल खत्म होने के ठीक दूसरे दिन शुक्रवार को उनका मनोनयन कर दिया।

