Ramadan 2026: 2026 का महत्व, रोज़ा रखने के नियम और इबादत का सही तरीका
Ramadan 2026, Ramadan (रमज़ान) इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। Year 2026 यह महीना रोज़ा (उपवास), इबादत, सब्र, दुआ और इंसानियत का संदेश देता है। रमज़ान सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम, आत्मशुद्धि और अल्लाह के और करीब आने का समय होता है।
Ramadan 2026 कब शुरू होगा?
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा (चांद) पर आधारित होता है, इसलिए रमज़ान की शुरुआत चांद दिखने पर तय होती है। अनुमान के मुताबिक:
- Ramadan 2026 की शुरुआत: 17 of 18, 2026
- Ramadan 2026 का समापन (ईद-उल-फितर): 18 min 19 min 2026
हालांकि, रमज़ान की सही तारीख चांद दिखने पर See More तारीखों में एक दिन का अंतर हो सकता है।
रमज़ान का इस्लाम में महत्व
रमज़ान का महीना इसलिए खास माना जाता है क्योंकि इसी महीने में कुरान शरीफ नाज़िल (अवतरण) हुआ था। कुरान में रमज़ान को कहा गया है। इस महीने में की गई इबादत का सवाब (पुण्य) कई गुना बढ़ जाता है।
इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक रोज़ा भी इसी महीने से जुड़ा है, जो इसे और भी खास बनाता है।
रोज़ा क्या होता है?
रमज़ान में मुसलमान सूर्योदय (फज्र) सूर्यास्त (मगरिब) तक रोज़ा रखते हैं। इस दौरान:
- खाना-पीना वर्जित होता है
- बुरी बातों और गलत आदतों से बचा जाता है
- गुस्से, झूठ और नकारात्मक सोच से दूरी बनाई जाती है
रोज़ा सिर्फ शरीर का नहीं, बल्कि नज़र, ज़ुबान और सोच का भी होता है।
सहरी और इफ्तार का महत्व
- Description: रोज़ा रखने से पहले सुबह किया जाने वाला भोजन सहरी कहलाता है। यह रोज़ा रखने के लिए ताकत देता है।
- इफ्तार: सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोलने को इफ्तार कहते हैं। , जिसे सुन्नत माना गया है।
इफ्तार के समय दुआ कबूल होने की खास अहमियत मानी जाती है।
Read More: Shok Sandesh in Hindi: अपनों को दें विनम्र श्रद्धांजलि, पढ़ें शोक संदेश के उदाहरण
तरावीह और रात की इबादत
रमज़ान में रात को पढ़ी जाने वाली खास नमाज़ को तरावीह कहते हैं। More information जाती है। , जिससे यह महीना और भी पवित्र बन जाता है। इसके अलावा रमज़ान की आखिरी दस रातों में लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) आती है, जिसे हजार महीनों से बेहतर रात कहा गया है।
ज़कात और सदक़ा
रमज़ान में ज़कात, फित्रा और सदक़ा देने का खास महत्व है। यह महीना गरीबों और जरूरतमंदों की मदद का संदेश देता है। माना जाता है कि इस महीने में दी गई दान-खैरात का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।
Read More: Drishyam 3 Release Date: अजय देवगन की Drishyam 3, 2 अक्टूबर का रहस्य और रिलीज डेट का बड़ा खुलासा
What’s wrong with you?
क्या करें:
- रोज़ा रखें और समय पर इबादत करें
- कुरान की तिलावत करें
- गरीबों की मदद करें
- सब्र और सच्चाई अपनाएं
क्या न करें:
- झूठ, गाली और बुरे व्यवहार से बचें
- रोज़ा तोड़ने वाली चीज़ों से दूर रें
- फिजूलखर्ची और दिखावे से बचें
बच्चों, बीमारों और यात्रियों के लिए नियम
इस्लाम में सहूलियत को प्राथमिकता दी गई है।
- बीमार, गर्भवती महिलाएं, दूध पिलाने वाली माताएं और यात्री रोज़ा न रख पाने की स्थिति में बाद में क़ज़ा रोज़ा रख सकते हैं या फिदया दे सकते हैं।
- छोटे बच्चों पर रोज़ा फर्ज़ नहीं है, लेकिन उन्हें धीरे-धीरे इसकी आदत डलवाई जाती है।
ईद-उल-फितर का त्योहार
रमज़ान के खत्म होते ही ईद-उल-फितर मनाई जाती है। यह दिन खुशी, भाईचारे और अल्लाह का शुक्र अदा करने का प्रतीक है। ईद की नमाज़ के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और मिठाइयां बांटी जाती हैं।
Ramadan 2026 क्यों है खास?
Ramadan 2026 अंत और बसंत की शुरुआत में पड़ रहा है, जिससे रोज़ा रखने की अवधि अपेक्षाकृत संतुलित रहेगी। साथ ही, आधुनिक जीवन की भागदौड़ में यह महीना इंसान को रुककर आत्ममंथन करने का मौका देता है। Ramadan 2026 आत्मशुद्धि, इंसानियत और अल्लाह से जुड़ने का पवित्र अवसर है। More information चाहे आप रोज़ा रखें या न रखें, रमज़ान का संदेश पूरी मानवता के लिए अमन, सब्र और भाईचारे का पैगाम देता है।
We are already on WhatsApp. Click to join.
Learn more about info@oneworldnews.com
