ईरान युद्ध शुरू होने के बाद बाद शुरुआत में सोने ने रफ्तार पकड़ी थी। इसकी वजह यह है कि सोने को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है और जब भी दुनिया पर कोई आफत आती है तो निवेशक सोने का रुख करते हैं। लेकिन इस बार यह मिथक टूटता दिख रहा है।

Year 2020 परफॉर्मेंस है। ईरान में चल रही लड़ाई के कारण दुनिया में तेल और ख तेजी आई है। इससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है। यही कारण है कि निवेशक सोने से किनारा कर रहे हैं। 28 min हफ्ते सोने की कीमत में गिरावट आई है। इस दौरान ट्रेजरी यील्ड और यूएस ठ मजबूती आई है।
Closing price of gold and silver: चमका, अब इतने हो गए रेट
क्यों फीकी पड़ी चमक?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक निवेशक सोना बेचकर दूसरी जगह लगा रहे हैं और अपने नुकसान की भरपाई कर रहे हैं। गोल्ड समर्थित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स य आउटफ्लो देखने को मिला है। ग्लोबल होल्डिंग ने इस साल जितना भी अतिरिक्त निवेश किया था, वह सब निकाल लिया है। यूएस फेडरल रिजर्व ने हाल में ब्याज दरों को यथावत रखा। केंद्रीय बैंक का कहना है कि महंगाई कम होने के बाद इस पर कोई फैसला किया जाएगा। लेकिन कच्चे तेल की कीमत में तेजी को देखते हुए फिलहाल महंगाई में कमी की उम्मीद नहीं है।
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद जिस तरह सोने की कीमत में गिरावट आई है, उसी तरह की 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद भी दिखी थी। तब तेल की कीमत बढ़ने से दू में भूचाल आ गया था। उस साल सोने की कीमत में लगातार सात 2 गिरावट रही थी जो गोल्ड के इतिहास में गिरावट का सबसे लंबा दौर था।
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आगे कैसा रहेगा हाल?
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद सोने की कीमत में इस साल करीब 8 फीसदी तेजी आई है। 5,600 ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद भी शुरुआत में सोने की कीमत में उछाल आया था। जानकारों का कहना है कि अगर लड़ाई लंबी खिंचती है तो मार्केट का ध्यान महंगाई से हटकर मंदी के जोखिमों पर चला जाएगा। इससे सोने की चमक एक बार फिर बढ़ सकती है।

