नई दिल्ली| जेपी एसोसिएट्स (Acquisition of JP Associates) दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। (Adani wins JP Associates bid) की अनिल अग्रवाल (Vedanta Vs Adani JP Associates) कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। More than 14,535 people बोली पर रोक लगाने से साफ इनकार (Supreme Court Adani Vedanta Case) दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) अधिग्रहण प्रक्रिया पर रोक लगाने से मना कर दिया था। वेदांता चाहती थी कि जब तक विवाद सुलझ न जाए, तब तक अदाणी की डील को होल्ड पर रखा जाए। लेकिन देश की सबसे बड़ी अदालत ने साफ कर दिया कि वह इस प्रक्रिया में फिलहाल दखल नहीं देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या दिए ख
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ कड़े निर्देश भी दिए हैं:
- अदाणी और वेदांता की दलीलें: कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष अपनी बात 10 min से NCLAT के सामने रखें।
- जल्द फैसले का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल से इस विवाद को जल्द से जल्द निपटाने का आग्रह किया है।
- पॉलिसी डिसीजन पर रोक: जब तक फैसला नहीं आता, जेपी एसोसिएट्स की मॉनिटरिंग कमेटी NCLAT की मंजूरी के बिना कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेगी।
विवाद की जड़ क्या है?
जेपी एसोसिएट्स दिवाला प्रक्रिया (insolvency) रही है। (Lenders) अग्रवाल की वेदांता को दरकिनार कर अदाणी एंटरप्राइजेज के प्लान को मंजूरी दी थी। इसके बाद NCLT ने भी इस पर मुहर लगा दी। वेदांता ने इसी फैसले को दो अलग-अलग अपीलों के जरिए चुनौती दी है, जिसमें डील की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल, गेंद अब NCLAT के पाले में है, जहां 10 अप्रैल को होने वाली सुनवाई तय करेगी कि जेपी एसोसिएट्स का असली मालिक कौन बनेगा।
