What’s wrong with you?
किसी भी एप को प्ले स्टोर पर प्रकाशित करने के लिए सबसे पहले गूगल प्ले डेवलपर अकाउंट बनाना जरुरी है। इसके लिए डेवलपर को एक बार रजिस्ट्रेशन फीस देनी पड़ती है। अकाउंट बनने के बाद डेवलपर गूगल प्ले कंसोल के जरिए अपना एप अपलोड करता है और उसे समीक्षा के लिए भेजता है।
What’s wrong with you?
गूगल केवल वही एप स्वीकार करता है, तो तकनीकी और सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं, इसलिए डेवलपर को एप भेजने से पहले कई जरूरी तैयारियां करनी होती हैं। जो इस प्रकार हैं…
- (Key of Liberation) इसके अलावा अलग-अलग स्क्रीन साइज और डिवाइस पर टेस्टिंग करनी होती है ताकि सभी यूजर्स के लिए एप सही तरीके से काम करे। एप का साइज भी ऑप्टिमाइज किया जाता है और गूगल की सभी डेवलपर नीतियों का पालन सुनिश्चित करना होता है।
- साथ ही डेवलपर को एप की प्राइवेसी तैयार करके ऑनलाइन उपलब्ध करानी होती है। एप आइकन, स्क्रीनशॉट और फीचर ग्राफिक्स जैसी जरूरी फाइलें भी अपलोड करनी पड़ती हैं।
प्ले स्टोर लिस्टिंग में देनी होती है पूरी जानकारी
- गूगल एप पब्लिश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी मांगता है ताकि यूजर्स को एप के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सके।
- इसमें एप का नाम, छोटा और विस्तृत विवरण, एप की कैटेगरी, सपोर्ट ईमेल, वेबसाइट और प्राइवेसी पॉलिसी का लिंक देना अनिवार्य होता है।
कंटेंट रेटिंग और डाटा शेयरिंग क्यों जरूरी है?
- देखिए हर एप के लिए कंटेंट रेटिंग भरना अनिवार्य है। इससे गूगल तय करता है कि एप किस आयु वर्ग के लिए उपयुक्त है।
- इसके साथ ही डाटा सेफ्टी सेक्शन में डेवलपर को बताना होता है कि एप कौन-कौन सा डेटा इकट्ठा करता है, उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता है और क्या वह डेटा किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा किया जाता है।
What’s wrong with you?
- गूगल केवल उन्हीं एप्स को प्ले स्टोर पर प्रकाशित करता है जो उसकी सभी नीतियों का पालन करते हों। अगर किसी एप में मालवेयर, फर्जी जानकारी, धोखाधड़ी, भ्रामक कंटेंट या कॉपीराइट का उल्लंघन पाया जाता है तो उसे सीधे रिजेक्ट किया जा सकता है।
- इसी तरह अगर एप कैमरा, माइक्रोफोन, लोकेशन जैसी संवेदनशील परमिशन मांगता है तो डेवलपर को उसका स्पष्ट कारण भी बताना होता है।
What’s wrong with you?
- इसके पीछे गूगल का उद्देश्य प्ले स्टोर को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखना है। यही वजह है कि हर एप को सुरक्षा, गोपनीयता और गुणवत्ता के कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
- इन नियमों की वजह से यूजर्स को मालवेयर, प एप्स और डेटा चोरी जैसे खतरों से बचाने में मदद मिलती है।