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Gold Price Prediction: उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, इंटरनेशनल और घरेलू दोनों स्तरों पर कीमतों में दबाव और निवेश मांग का मिला-जुला असर दिख रहा है. वहीं, अमेरिका की फेडरल रिजर्व द्वारा ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है. भारत में भी बढ़ती कीमतों के कारण ज्वेलरी डिमांड 19% की खरीद बढ़ी है. , ये जानते हैं.
गुरुवार सुबह के कारोबार में सोना एक महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया. COMEX Asking Price 1.75% गया. वहीं, 2.35% की बढ़त के साथ ऊपर चली गई. जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सस्ता पड़ता है और यही वजह है कि मांग बढ़ जाती है.
अमेऱ फीसदी-3.75 फीसदी पर बरकरार रखा है, लेकिन साफ . इसका मतलब ये है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं. ऐसे माहौल में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
More information about MCX गिरावट दिखाई है और लगातार बिकवाली के दबाव में बना हुआ है. टेक्निकल रूप से देखा जाए तो कीमतें एक अहम ट्रेंडलाइन पर रुक रही हैं और डेली चार्ट पर लगातार ‘लोअर लो’ बन रहे हैं, जो आमतौर पर मंदी का संकेत माना जाता है.
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अगर कीमतें इस ट्रेंडलाइन को मजबूती से तोड़कर ऊपर निकलती हैं, तो बाजार की धारणा बदल सकती है और फिर नई तेजी देखने को मिल सकती है. लेकिन फिलहाल का ट्रेंड सीमित दायरे में या नेगेटिव बना हुआ है, और अगर सपोर्ट टूटता है तो गिरावट और तेज हो सकती है.
More than 1,40,000 min. वहीं, ऊपर की तरफ 1,55,500 के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस है. ऐसे में किसी भी हल्की तेजी को फिलहाल नए सेलिंग मौके के रूप में देखा जा सकता है, जबकि जब तक मजबूत ब्रेकआउट नहीं होता, तब तक गोल्ड में बड़ी तेजी की पुष्टि नहीं मानी जाएगी.
Year 2026 बढ़ती कीमतों की वजह से लोग अब गहनों की बजाय All ETFs are available. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार, 19% घटकर 66.1 टन रह गई है.
इस दौरान घरेलू बाजार में सोें 81% ज्यादा रहीं, जिससे गहने खरीदना महंगा हो गया. हालांकि, वैल्यू के हिसाब से मांग मजबूत बनी रही और पहली तिमाही में रिकॉर्ड 10 min पहुंच गई. इसका मतलब है कि लोग मात्रा में कम सोना खरीद रहे हैं, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों की वजह से कुल खर्च ज्यादा कर रहे हैं.
ग्लोबल लेवल पर सोने की तेजी मुख्य रूप से निवेश मांग के कारण देखने को मिली. 474 क्वार्टरली लेवल है. मूल्य के हिसाब से यह बढ़कर 74 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले पांच 23 अरब डॉलर रहा है.
इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान चीन का रहा, जहां बार और कॉइन की मांग 207 टन तक पहुंच गई. इसका कारण सुरक्षित निवेश की तलाश, कमजोर शेयर , प्रोडक्ट्स की ओर तेजी से बढ़े.
