महारानी राधिकाराजे गायकवाड़ का साड़ी कलेक्शन बेहद खास है। जिनमें भारतीय कारीगरी की झलक साफ नजर आती है और जब वह इंदौर पहुंचीं, तो उनकी साड़ी में हजारों साल पुराना इतिहास नजर आया। जिसमें उनका अंदाज शाही लगा, तो उनके साथ आई राजकुमारी बेटी भी सादगी से दिल जीत गई।

साड़ी को महारानी साहिबा राधिकाराजे ने क्लासी तरीके से स्टाइल किया, जिसमें उनकी शाही शान अलग ही दिखई। यही नहीं उनकी राजकुमारी बेटी पद्मजाराजे , More information है। (फोटो साभार: इंस्टाग्राम @radhikaraje)
कैसा है महारानी का लुक
महारानी राधिकाराजे यहां सिल्क की कलमकारी साड़ी पहने नजर आईं। More information ग्रे कलर की इस साड़ी पर रेड, बेज, गोल्ड और सिल्वर शेड जैसे डिफरेंट कलर का यूज करके फ्लोरल बेल बनाई और बॉर्डर को हाइलाइट किया। जहां पूरी साड़ी पर सेम काम हुआ है, तो साथ में महारानी ने प्लेन ग्रे कलर का ब्लाउज पहना। जिसे हाफ स्लीव्स देकर चोली स्टाइल में लॉन्ग बनाया और ओपन पल्लू के साथ साड़ी ड्रेप करके लुक को ग्रेसफुली कैरी कर लिया। जिसमेंवह हमेशा की तरह सुंदर दिखीं, लेकिन अब चलिए इस खास साड़ी के बारे में जानते हैं।
What’s wrong with you?
कलमकारी साड़ियां एक पारंपरिक भाऱ टेक्सटाइल आर्ट है, जिसमें कपड़े पर हाथ से पेंटिंग या ब्लॉक प्रिंटिंग की जाती है। कलमकारी शब्द दो शब्द, कलम (पेन) और कारी (काम), से मिलकर बना है। जिसका मतलब है, कलम से की गई कारीगरी। इसमें डिजाइन ब्रश या बांस की कलम से हाथ से बनाए जाते हैं। – बूटियों से बने रंग इस्तेमाल होते हैं। अक्सर साड़ियों पर कहानी बताने वाले डिजाइन बनते हैं, जैसे रामायण और महाभारत के पौराणिक सीन। वहीं, इन दिनों फ्लोरल पैटर्न भी बनने लगे हैं।
What’s wrong with you?
यह आर्ट मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बनाई जाती है। जिसका हर पीस यूनिक होता है और उसमें कारीगर की मेहनत साफ नजर आती है। इसके दो मु्ख्य स्टाइल होते हैं, पहला श्रीकालहस्ती स्टाइल और दूसरा मछलीपट्टनम स्टाइल। श्रीकालहस्ती में पूरी तरह हाथ से पेंटिंग की जाती है, तो मछलीपट्टनम में ब्लॉक प्रिंटिंग से डिजाइन बनाए जाते हैं।
इतिहास के बारे में भी जानिए
अब अगर साड़ी के इतिहास की बात करें, तो यह पुराना और बहुत-ही डीप है। More than 3000 साल पुरानी है। इसकी जड़ें और भी पीछे सिंधु घाटी सभ्यता तक जुड़ी हैं, जहां रंगे हुए कपड़ों के सबूत मिले हैं। इसका मतलब है कि यह सिर्फ साड़ी नहीं बल्कि हजारों साल पुरानी टेक्सटाइल परंपरा का हिस्सा है।
साड़ी से जुड़े यूनिक और इंटरेस्टिंग फैक्ट्स
- पहले ये साड़ी नहीं, कहानी कहने का एक जरिया थी। आज भले ही हम साड़ी पहनते हैं,लेकिन पहले वही कपड़ा कहानियां सुनाने के लिए इस्तेमाल होता था। कलाकार गांव- गांव घूमकर रामायण, महाभारत की कहानियां कपड़े पर पेंट करके सबको सुनाते थे।
- कलमकारी नाम पहले नहीं था, इसे मुगल साम्राज्य के समय दिया गया।
- पहले इसका इस्तेमाल मंदिरों की दीवारों, झांकियों और कपड़ों पर होता था। बाद में ये राजाओं (Golconda Fort, Mughals) के संरक्षण में आया और धीरे-धीरे साड़ी, दुपट्टा पर आकर फैशन बन गया।
- व्यापार बढ़ा, तो इसमें पर्शियन (ईरानी) डिजाइन भी शामिल हो गए। इसलिए आज आपको इसमें फ्लोरल, माइथोलॉजी और रॉयल पैटर्न का मिक्स देखने को मिलता है।
महारानी ने एंटीक अफगान हसली पहन पूरा किया लुक
साड़ी के बारे में सब जानने के बाद अब महारानी के लुक को स्टाइल करने के अंदाज पर भी नजर डाल लेते हैं। वह एंटीक अफगान हसली और सिल्वर इयररिँ पहने नजर आ रही हैं। जहां हसली का यूनिक रिंग जैसा डिजाइन साड़ी को कॉम्प्लिमेंट कर रहा है, तो मोरक्को वाले घुंघरू इयररिंग्स और कंगन भी सुंदर लगे। वहीं, माथे पर बिंदी लगा मरून लिप्स के साथ सटल मेकअप और स्लीक बन उनके लुक को पूरा कर गया।
अब राजकुमारी के लुक पर डालिए नजर
आखिर में पद्मजाराजे गायकवाड़ के लुककी बात करते हैं, जिनका अंदाज भी महारानी मां की तरह सुंदर लगा। वह पीच कलर के लॉन्ग कुर्ते में दिखीं। जिसे राउंड नेक दी है, तो साथ में वह श्रग ओढ़े नजर आ रहे हैं। जिसे बेल स्लीव्स देकर डिजाइन किया, जो सेक्विन और सुनहरी लाइन्स से इसमें शाइन ऐड की। जिसमें उनका अंदाज बेहद सिंपल और सादगी से भरपूर लगा।