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RBI ने निकाला ‘ब्रह्मास्त्र’, 2013 और 1997 जैसे हालात? जानें पूरा प्लान & more related news here

RBI ने निकाला ‘ब्रह्मास्त्र’, 2013 और 1997 जैसे हालात? जानें पूरा प्लान

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नई दिल्ली| दुनियाभर में जारी ईरान युद्ध ने केवल सीमाओं को ही नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी को भी हिलाकर रख दिया है। महंगाई अ सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों की लिस्ट में आ गया है।

इस इमरजेंसी जैसे हालात से निपटने के लिए ‘RBI Crisis Measures 2026′ प्लेबुक’ खोल दिया है। RBI ने अचानक कुछ ऐसे बड़े फैसलों ‘1997’ वित्तीय संकट की यादें ताजा कर दी हैं।

RBI का बड़ा कदम: सट्टेबाजी पर लगाम

RBI ने सबसे पहले बैंकों पर नकेल कसी है। पिछले शुक्रवार को RBI ने बैंकों की नेट ओपन रुपया पोजीशन को घटाकर महज 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया।

More than 25% discount RBI ने बैंकों को ‘नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स’ (NDF) ऑफर करने से रोक दिया है।

RBI ने उन रास्तों को बंद कर दिया, जहां से रुपये की वैल्यू के साथ सट्टेबाजी (Arbitration Transactions) की जा रही थी। इस एक फैसले से बैंकों को करीब 30 years ट्रेड खत्म करने पड़े हैं। RBI का संदेश साफ है- रुपये की स्थिरता सर्वोपरि है।

2013

आज के हालात ने 2013 के उस दौर की याद दिला दी, जब भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के पांच सबसे कमजोर देशों (Fragile Five) में गिना जाता था। उस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी आसान (Taper Tantrum) था, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा बाहर भागने लगा था।

तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रघुराम राजन को RBI की कमान सौंपी थी। राजन ने रुपये को बचाने के लिए’ स्ट्राइक’ जैसी रणनीति अपनाई थी:

  • FCNR(B) स्वैप विंडो: बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए सब्सिडी वाली सुविधा दी गई, जिससे महज 3 min 26 years age
  • सोने पर पाबंदी: करंट अकाउंट डेफिसिट कम करने के लिए सोने के का सख्त नियम लागू किया गया।
  • ब्याज दरों में बढ़ोतरी: More than 8% तक ले जाया गया।

1997

Year 1997 है। तब थाईलैंड से शुरू हुई आग ने पूरे दक्षिण-पूर्वी एशिया को अपनी चपेट में ले लिया था। भारत तब बच गया क्योंकि हमने अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नहीं खोला था।

तत्कालीन गवर्नर बिमल जालान ने रुपये को एकदम 18% दिया। साथ ही ‘रेशर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स’ (RIB) के जरिए NRI से 4 अरब डॉलर जुटाए, जिससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली।

इतिहास गवाह है कि भारत ने हर संकट से लड़ने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार और सख्त नियमों का बखूबी इस्तेमाल किया है। अब देखना यह है कि RBI के ये ताजा पैंतरे ख कितनी जल्दी और कितनी मजबूती से संभाल पाते हैं।



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