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tips for using air conditioning save electricity bill energy saving guide in summer | दिनभर A.C. बिल, इन टिप्स को फॉलो करके ऐसे बचाएं इल & more related news here

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AC Tips: बिजली का बिल बढ़ जाता है, ऐसा डर अक्सर देखा जाता है. इसी डर के चलते कई लोग एसी खरीदने से भी हिचकिचाते हैं. लेकिन कुछ टिप्स को ध्यान में रखकर एसी इस्तेमाल करने से बिजली का बिल कम आएगा. कई लोग इन टिप्स को जाने बिना ही एसी से जुड़ी गलतियां कर बैठते हैं. जानिए वो टिप्स क्या हैं और बिजली का बिल कैसे कम करें.

AC Tips: इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है. अब जब एसी चल रहे हैं तो बिजली का बिल भी ज्यादा आएगा. बिजली का बिल ज्यादा आएगा तो ज्यादा पैसे देने होंगे. – आपको एसी की वजह से बढ़े बिल को कम कर सकैं. साथ ही इन बदलाव से पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकता है. आइए जानते हैं एसी में किन चीजों के बदलाव करने से एसी के बिजली का बिल कम आएगा और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा.

केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) की सिफारिश के अनुसार, एसी 24 से 25 डिग्री के बीच सेट करने की सलाह दी है. मंत्रालय का कहना है कि इसे 18 से 21 डिग्री के बीच सेट करना जरूरी नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर को आराम देने वाले तापमान और बिजली की खपत के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए यह सही तापमान है.

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर आप तापमान कम पर सेट कर दें तो कमरा जल्दी ठंडा हो जाएगा. लेकिन एसी ठंड पैदा नहीं करता, बल्कि कमरे से गर्मी निकालता है. इसलिए आप टेंपरेचर चाहे जो भी सेट करें, ठंडा करने की गति लगभग एक जैसी ही रहती है. फर्क सिर्फ इतना है कि यह कितने समय तक चलता है. More information बिजली की बचत होती है. 20 डिग्री से24 से 24 प्रतिशत तक कम हो सकता है. उदाहरण के लिए, अगर आपका एसी रोजाना 20 min बिजली की खपत करता है, तो 20 की जगह 24 डिग्री करने पर सिर्फ 15 min 16 min यूनिट बिजली की खपत होगी. (यह सिर्फ एक उदाहरण है)

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अगर देशभर के लाखों घरों में इस आदत को अपनाया जाए, तो इसका बहुत बड़ा असर होगा. करोड़ों यूनिट बिजली की बचत होगी और बिजली की मांग में काफी कमी आएगी. एसी इस तरह काम करता है कि यह कमरे की गर्मी को खींचकर बाहर निकालता है. इसमें कंप्रेसा हिस्सा ज्यादा बिजली खर्च करता है. जब टेंपरेचर कम रखा जाता है, तो कंप्रेसर ज्यादा देर तक चलता है. इससे बिजली का बिल बढ़ जाता है. अगर आप तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखते हैं, तो कमरा जल्दी ही उस टेंपरेचर तक पहुंच जाएगा. फिर कंप्रेसर रुकता है और दोबारा चालू होता है. हालांकि, इन्वर्टर एसी में इसकी गति कम होती है और यह स्थिर रूप से चलता है. इससे बिजली की खपत कम होती है.

BEE स्टार रेटिंग सिस्टम भी बहुत महत्वपूर्ण है. रेटिंग 1 स्टार से 5 स्टार तक होती है. उच्च स्टार रेटिंग वाला एसी कम बिजली मेँ ही ठंडक प्रदान करता है. 5 स्टार एसी व लंबे समय में यह बिल कम कर देगा. यह आमतौर पर 3 स्टार एसी की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत कम बिजली का उपयोग करता है. यह अंतर 3 से 5 वर्षों में खरीद लागत को संतुलित कर देता है. अब कई एसी में इको मोड, स्लीप मोड और इन्वर्टर तकनीक होती है. इको मोड में कंप्रेसर कम बिजली का उपयोग करता है. , इससे बिजली की खपत कम होती है.

स्लीप मोड रात में बहुत उपयोगी होता है. चूंकि सोते समय शरीर स्वाभाविक रूप से ठंडा हो जाता है, इसलिए एसी धीरे-धीरे तापमान को 1 से 2 डिग्री तक बढ़ा देता है. इससे अनावश्यक ठंडक कम हो जाती है. इन्वर्टर तकनीक ने एक बदलाव लाया है. यह कंप्रेसर को बार-बार चालू और बंद करने के बजाय उसकी गति को कम कर देता है. इससे बिजली की खपत कम हो जाती है. यह सामान्य एसी की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत बिजली बचाता है. कमरे को अच्छी तरह बंद रखना भी बहुत जरूरी ै. अगर दरवाजे और खिड़कियां खुली रहेंगी तो ठंडी हवा बाहर निकल जाएगी. इससे एसी को ज्यादा देर तक चलना पड़ेगा.

धूप रोकने वाले पर्दे या स्क्रीन का इस्तेमाल करने से कमरे की गर्मी कम हो जाती है. गर्मी छोटे-छोटे छेदों से भी अंदर आ सकती है, इन्हें बंद करने से एसी का काम कम हो जाता ै. एसी फिल्टर की सफाई बहुत जरूरी है. अगर फिल्टर में धूल जमा हो जाती है, तो हवा ठीक से सर्कुलेट नहीं हो पाती. इससे एसी ज्यादा बिजली खर्च करता है. इससे बिजली का बिल 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ जाता है. गर्मियों में हर 2 से 3 हफ्ते में फिल्टर साफ करना अच्छा रहता है. साल में एक या दो बार एसी की सर्विसिंग करानी चाहिए. गैस का लेवल चेक करना, कॉइल की सफाई करना और लीकेज की जांच करना जरूरी है.

. जरूरत ना होने पर एसी अपने आप बंद हो जाएगा. आप इसे इस तरह नियंत्रित कर सकते हैं कि यह पूरी रात ना चले. सबसे ज़्यादा गर्मी के समय से पहले थोड़ी देर के लिए एसी चलाना और फिर उसे कम कर देना भी एक अच्छी आदत है. घर में गर्मी बढ़ाने वाली गतिविधियां भी एसी को प्रभावित करती हैं. खाना बनाना, ओवन का इस्तेमाल करना और इस्त्री करना कमरे का तापमान बढ़ा देते हैं. इससे एसी को ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है. एलईडी लाइटों का इस्तेमाल करने से कम गर्मी पैदा होती है. पुराने बल्ब ज़्यादा गर्मी पैदा करते हैं.

सही आकार का एसी चुनना भी बहुत महत्वपूर्ै. एक छोटा एसी बड़े कमरे में काम नहीं कर सकता और अधिक बिजली की खपत करेगा. सही क्षमता वाला एसी चुनते समय कमरे आकार, छत की ऊंचाई, धूप और कमरे में मौजूद लोगों की संख्या का ध्यान रखना चाहिए। बिजली की खपत पर नज़र रखना भी उपयोगी है। स्मार्ट मीटर और ऐप्स दैनिक खपत दिखाते है। इससे पता चलता है कि किस समय बिजली का खर्च सबसे अधिक होता है। ऐसे छोटे-छोटे बदलाव करके गर्मियों में काफी बिजली बचाई जा सकती है.

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