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Uttarakhand Congress incomplete; The organization is lagging before the elections & more related news here


उत्तराखंड में राहुल गांधी के दौरे पर टिकी कांग्रेस की उम्मीदें, नई कार्यकारिणी के ऐलान का इंतजार। एआई जेनरेटेड

2027 लेकिन उत्तराखंड कांग्रेस अभी तक अपनी प्रदेश कार्यकारिणी घोषित नहीं कर पाई है। दिलचस्प यह है कि पिछले करीब छह वर्षों में प्रदेश कांग्रेस की कमान तीन अलग-अलग कार्यकालों में दो नेताओं के हाथों में रही, म

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More information गणेश ख दिन हो चुके हैं, लेकिन पार्टी अभी भी बिना कार्यकारिणी के चल रही है। इससे पहले उनके पहले कार्यकाल और फिर करन माहरा के पूरे अध्यक्षीय कार्यकाल में भी नई कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका था। Year 2021 रहा।

ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव सिर पर हैं और भाजपा पहले से बूथ स्तर तक सक्रिय दिखाई दे रही है, कांग्रेस अभी भी संगठनात्मक संतुलन, गुटीय समीकरण और पदों के बंटवारे के गणित में उलझी नजर आ रही है। , आंदोलनों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता का आधार मजबूत संगठन होता है, ऐसे में कार्यकारिणी गठन में लगातार हो रही देरी कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर रही है।

17 years थी।

6 साल में 3 अध्यक्ष, फिर भी नहीं बनी ञ

1. बनी January 22, 2021 अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय भी संगठन में नई कार्यकारिणी के गठन की 2022 चुनाव में हार के बाद गोदियाल ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया और कार्यकारिणी का सवाल अधूरा ही रह गया।

2. January 10, 2022 बनाया गया। करीब साढ़े तीन साल तक संगठन की कमान संभे के बावजूद वह भी नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाए। इस दौरान कई बार सूची तैयार होने और हाईकमान केपास भेजे जाने की चर्चाएं हुईं, लेकिन अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी।

3. जारी January 13, 2025 उन्हें पद संभाले करीब 201 दिन हो चुके हैं, लेकिन कार्यकारिणी की घोषणा अब तक नहीं हो पाई है। ऐसे में जुलाई 2021 से अब तक कांग्रेस अध्यक्ष बदलती रही, लेकिन संगठन की पूरी टीम का गठन नहीं हो सका।

72 min

इस बार कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश कार्यकारिणी को छोटा रखने का फैसला किया है। अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष के अलावा आ उपाध्यक्ष, 22 महासचिव और 40 सचिव बनाए जाने हैं। यानी कुल 72 पद ही उपलब्ध हैं। पिछली कार्यकारिणी 230 से अधिक नेताओं को जगह मिली थी। ऐसे में हर नियुक्ति राजनीतिक संतुलन से जुड़ गई है।

कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 और 5 जून को दो दिवसीय दी आएंगे।

अब 5 बड़े समीकरण के बारे में जानिए…

1. गढ़वाल-कुमाऊं का संतुलन बड़ी चुनौती

More information कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती यह रहेगी कि कार्यकारिणी में दोनों मंडलों को ऐसा प्रतिनिधित्व मिले, जिससे किसी क्षेत्र की उपेक्षा का संदेश न जाए। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल गढ़वाल से आते हैं, इसलिए कुमाऊं के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं भी बढ़ी हुई हैं। अगर किसी एक क्षेत्र का पलड़ा भारी दिखाई दिया तो संगठन के भीतर असंतोष पैदा हो सकता है।

2.

कांग्रेस लगातार युवाओं को आगे लाने और संगठन में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात कर रही है। More information व भूमिका की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में कार्यकारिणी में नए चेहरों को जगह देने के साथ अनुभवी नेताओं को भी साधना नेतृत्व के लिए आसान नहीं होगा। Year 2027

3.

प्रदेश कार्यकारिणी केवल संगठनात्मक टीम नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी होती है। More information देना कांग्रेस की प्राथमिकता होगी। पार्टी यह संदेश देना चाहेगी कि संगठन में सभी वर्गों की भागीदारी है। यदि किसी बड़े सामाजिक वर्ग को अपेक्षित स्थान नहीं मिला तो उसका राजनीतिक असर भी दिखाई दे सकता है।

4.

कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और राजनीतिक भागीदारी को लेकर लगातार मुखर रही है। ऐसे में कार्यकारिणी में महिलाओं को पर्याप्त संख्या में जिम्मेदारी देना पार्टी के लिए राजनीतिक और नैतिक दोनों तरह की जरूरत है। महिला नेताओं की उम्मीद है कि इस बार केवल औपचारिक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि प्रभावी पदों पर भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे संगठन के भीतर सकारात्मक संदेश जाएगा।

5.

2022 विधानसभा चुनाव में कtric चेहरे चुनाव हार गए थे। More information उम्मीद लगाए बैठे हैं। सीमित पदों के कारण सभी को समायोजित करना संभव नहीं होगा। ऐसे में नेतृत्व को यह तय करना होगा कि संगठन में सक्रियता, राजनीतिक प्रभाव और भविष्य की जरूरतों के आधार पर किसे मौका दिया जाए। यही वह समीकरण है, जो कार्यकारिणी गठन को सबसे अधिक जटिल बना रहा है।

2023 संबोधित करते राहुल गांधी, तब भारी भीड़ उमड़ी थी।

देरी पर क्या बोले कांग्रेस नेता

माहरा बोले- राजनीतिक समीकरणों के कारण हुई देरी

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा का कहना है कि कार्यकारिणी गठन में देरी के पीछे कई कारण होते हैं। संगठन में विभिन्न नेताओं, क्षेत्रों और राजनीतिक समीकरणों का संतुलन साधना पठ इसलिए प्रक्रिया लंबी हो जाती है। हालांकि अब अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और जल्द फैसला होने की उम्मीद है।

कभी-कभी राजनीतिक ताना-बाना और विभिन्न समीकरणों का भी ध्यान रखना पड़ता है। अब सहमति बन गई है और मुझे लगता है कि एक-दो महीने के भीतर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन हो जाएगा।

यशपाल बोले- फैसला हाईकमान को करना है

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य का कहना है कि प्रदेश कार्यकारिणी के गठन का अंतिय पार्टी हाईकमान को लेना है। उनके मुताबिक संगठन के अधिकांश ढांचे, जैसे बूथ, ब्लॉक और जिला स्तर की समितियां पहले ही बन चुकी हैं, अब केवल प्रदेश कार्यकारिणी का गठन बाकी है।

हमारी प्रभारी कुमारी सैलजा जी ने भी कहा है कि जल्द ही उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी का गठन होगा। उम्मीद है कि इसी महीने कार्यकारिणी का गठन हो जाएगा।

आर्य का मानना है कि प्रदेश कार्यकारिणी 2 गठन के बाद कांग्रेस 2027 More information स्तर पर गति मिलेगी।

राहुल का दौरा चुनावी शंखनाद की तरह देख रही कांग्रेस

उत्तराखंड कांग्रेस की निगाहें अब 4 और 5 जून को प्रस्तावित राहुल गांधी के दौरे पर टिकी हैं। पार्टी के भीतर माना जा रहा है कि इस दौरे के बाद लंबे समय से लंबित प्रदेश कार्यकारिणी को लेकर अंतिम फैसला हो सकता है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भी संकेत दिए हैं कि राहुल गांधी के दौरे के बाद संगठन से जुड़े अहम निर्णय लिए जाएंगे। ऐसे में यह अ विधानसभा चुनाव की तैयारियों की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

राहुल गांधी के बाद कांग्रेस नेतृत्व के अन्य बड़े चेहरों के भी उत्तराखंड आने की संभावना जताई जा रही है। प्रदेश प्रभारी के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा के दौरे भी प्रस्तावित हैं। यदि कार्यकारिणी का ऐलान इन दौरों से पहले या तुरंत बाद होता है तो इसे कांग्रेस के चुनावी अभियान के पहले बड़े संगठनात्मक कदम के तौर पर देखा जाएगा।

अब जानिए एक्सपर्ट क्या कहते स

राजनीतिक विश्लेषक जय सिंह रावत का कहना है कि उत्तराखंड कांग्रेस में कार्यकारिणी 2 देरी कोई नई बात नहीं है। उनके मुताबिक यह समस्या वर्षों से चली आ रही है। प्रीतम सिंह के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान भी करीब दो साल तक कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया था। बाद में अध्यक्ष बदले, लेकिन संगठन को पूर्ण रूप देने की प्रक्रिया लगातार टलती रही। उन्होंने कहा कि,

उत्तराखंड कांग्रेस में कार्यकारिणी 2 देरी कोई नई बात नहीं है। प्रीतम सिंह के समय भी करीब दो साल तक कार्यकारिणी नहीं बन पाई थी। अध्यक्ष बदलते रहे, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को पूरा करने की प्रक्रिया टलती रही।

रावत का कहना है कि कांग्रेस में आ गठन केवल संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन का मामला भी होता है। More information जाता है। यही वजह है कि उत्तराखंड कांग्रेस लंबे समय से बिना पूर्ण कार्यकारिणी के काम करती रही है।

हालांकि, रावत मानते हैं कि इस बार परिस्थितियां कुछ अलग हैं। Year 2027 More information रहा है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं की नजर इस बात पर रहेगी कि दौरे के बाद लंबे समय से लंबित कार्यकारिणी गठन पर आखिर फैसला होता है या नहीं।

राहुल पहले अल्मोड़ा और फिर जाएंगे पौड़ी

राहुल गांधी 4 जून को अल्मोड़ा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वे पौड़ी में आयोजित पूर्व सैनिक सम्मेलन में भाग लेंगे। उत्तराखंड को सैनिकों और पूर्व सैनिकों का प्रदेश माना जाता है, इसलिए कांग्रेस इस कार्यक्रम को राजनीतिक रूप से बेहद अहम मान रही है।

5 years old जिला अध्यक्षों और विभिन्न प्रकोष्ठों के प्रतिनिधियों के साथ मैराथन बैठकों में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इन्हीं बैठकों में संगठन की असल स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा होगी।

राहुल गांधी ने तीन महीने पहले ‘मोहम्मद ‘ से मुलाकात का वीडियो जारी किया था, अब कोटद्वार में फिर मिलेंगे।

राहुल कोटद्वार में लेंगे जिम की सदस्यता

पौड़ी में पूर्व सैनिकों के सम्मेलन में शामिल होने के बाद राहुल गांधी करीब डेढ़ घंटे के लिए कोटद्वार में भी रुकेंगे। More information More information इसी साल जनवरी में अपनी दुकान के नाम को लेकर हुए विवाद के बाद चर्चा में आए थे।

More information का प्रतीक बताया था। ऐसे में कोटद्वार में उनकी यह मुलाकात कांग्रेस के सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के संदेश से जोड़कर देखी जा रही है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि समाज में सद्भाव और आपसी विश्वास का संदेश देने का प्रयास है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सैनिक सय के बीच संवाद और कोटद्वार का यह कार्यक्रम, दोनों मिलकर राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे को राजनीतिक के साथ-साथ प्रतीकात्मक महत्व भी प्रदान करते हैं।

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