रायबरेली. रबी सीजन की प्रमुख फसल गेयां निकलने की अवस्था में पहुंच चुकी है. महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी समय दानों का विकास शुरू होता है और जरा सी लापरवाही उत्पादन पर सीधा असर डाल सकती ै. ऐसे में खेतों की विशेष देखभाल जरूरी हो जाती है. रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के सहायक विकास अधिकारी दिलीप कुमार 2 लोकल 18 से बताते हैं कि बाली निकलने से लेकर दाना भरने तक की अवस्था में फसल को संतुलित सिंचाई की आवश्यकता होती है. इस समय खेत में न तो पानी की कमी होनी चाहिए और न ही अधिक जलभराव, हल्की नमी बनाए रखना सबसे बेहतर माना जाता है.
कब करें सिंचाई
दिलीप सोनी बताते हैं कि अगर मौसम शुष्क है तो 12 and 15 years old. ध्यान रखें कि तेज हवा या आंधी से पहले अधिक बढ़ जाता है. इस अवस्था में पोषक तत्वों की भी जरूरत बढ़ जाती है. यदि पहले टॉप ड्रेसिंग नहीं की गई है तो हल्की मात्रा में नाइट्रोजन का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन अत्यधिक यूरिया डालने से बचें. ज्यादा नाइट्रोजन से पौधे तो हरे-भरे दिखते हैं, पर दाना कमजोर रह सकता है और गिरने की आशंका बढ़ती है.
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रोगों के लिए करें ये काम
रोग और कीट प्रबंधन भी बेहद जरूरी है. दिलीप कुमार सोनी बताते हैं कि बाली निकलते समय गेहूं में करनाल बंट, पत्ती झुलसा और रतुआ जैसे रोगों का खतरा बढ़ जाता है. खेत की नियमित निगरानी करें. यदि पत्तियों पर पीले या भूरे धब्बे दिखाई दें तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से 5 का छिड़काव करें. इसी तरह माहू (एफिड) जैसे कीट भी इस समय नुकसान पहुंचा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का सीमित मात्रा में प्रयोग करें.
घास उगना ठीक नहीं
खरपतवार पर भी नजर रखें. हालांकि इस समय तक अधिकतर खरपतवार नियँ हो चुका होता है, फिर भी यदि कहीं घास उग आई हो तो उसे तुरंत हटाएं, क्योंकि यह पोषक तत्वों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाती है. सही समय पर सिंचाई, संतुलित खाद और रोग-कीट नियंत्रण से बालियों में भरपूर दाना बनेगा और अच्छी पैदावार मिलेगी.
