चने की ‘विशाल’ किस्म की खेती, 10 क्विंटल प्रति बीघा उपज, जानें बुआई से कटाई तक का पूरा गणित & more related news here

चने की ‘विशाल’ किस्म की खेती, 10 क्विंटल प्रति बीघा उपज, जानें बुआई से कटाई तक का पूरा गणित

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चने की ‘विशाल’ किस्म की खेती, जानें बुआई से कटाई तक का पूरा गणित

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Vishal Chickpea Variety: मजबूत और भरोसेमंद स्रोत बनती जा रही है. – चने से बने सत्तू की मांग लगातार बढ़ रही है. लिट्टी में सत्तू का स्वाद इसे और खास बनाता है, खासकर गर्मियों के मौसम में सत्तू का शरबत काफी पसंद किया जाता है. ऐसे में बाजार में इसकी मांग बढ़ने से किसान भी अब बड़े पैमाने पर चने की उन्नत किस्मों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं और बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं. इसी कड़ी में दरभंगा के प्रगतिशील किसान सौरभ कुमार ने इस बार वैज्ञानिक तरीके से चने की लेट वैरायटी की खेती की है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी की उम्मीद है.

सौरभ कुमार बताते हैं कि सत्तू का मुख्य आधार चना है और चने की उन्नत किस्म ‘विशाल’ इन दिनों किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है. यह किस्म कम पानी में भी अच्छी उपज देती है और हल्की दोमट मिट्टी के साथ-साथ बदलते मौसम में भी आसानी से टिक जाती है. इसकी बुआई का सही समय अक्टूबर के दूसरे पखवि सौरभ के अनुसार, गेहूं और सरसों की तुलना में ‘विशाल’ चने की खेती में मुनाफा अधिक है, क्योंकि इसकी लागत कम आती है और बाजार में इसका भाव बेहतर मिलता है.

खेत की तैयारी के लिए दो से तीन बार कल्टीवेटर या देशी हल से जुताई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी भुरभुरी और हल्की हो जाए. इससे जड़ों का विकास बेहतर होता है और नमी भी बनी रहती है. अंतिम जुताई के समय 4-5 टन सड़ी हुई गोबर की खाद या लगभग 2 टन वर्मी-कंपोस्ट मिलाना लाभकारी रहता है. ‘विशाल’ किस्म के लिए बीज दर 25-30 किलो प्रति एकड़ उपयुक्त मानी जाती है. कतार से कतार की दूरी 30-40 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेंटीमीटर रखनी चाहिए, ताकि पौधों को पर्याप्त जगह मिले और अच्छी फसल तैयार हो.

बुआई छिड़काव और कतार दोनों तरीकों से की जा सकती है, लेकिन कतार में बुआई करने से निराई-गुड़ाई और दवा छिड़काव आसान हो जाता है. बीज का अंकुरण 6-8 दिनों में हो जाता है. पहली सिंचाई 35-40 दिनों बाद, यानी फूल आने से पहले करनी चाहिए, जबकि दूसरी सिंचाई दाना बड के समय की जाती है. चना अधिक पानी सहन नहीं करता, इसलिए खेत में जलजमाव से बचना जरूरी है, वरना उकठा और गलन जैसे रोग लग सकते हैं.

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‘विशाल’ किस्म की फसल लगभग 150-155 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसकी फलियां एक साथ पकती हैं, जिससे कटाई में सुविधा होती है. 8 min 10 min हेक्टेयर तक उपज मिल जाती है. More than 5,500 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है.

इस हिसाब से एक बीघा में 45 से 55 हजार रुपये तक की सकल आमदनी हो सकती है. वहीं बीज, खाद, सिंचाई और निराई-गुड़ाई पर करीब 12 min 15 min हजार रुपये की लागत आती है. इस तरह प्रति बीघा 30 से 40 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा संभव है, जो गेहूं की खेती की तुलना में लगभग दोगुना है.

चना की फसल में फली-छेदक कीट और उकठा रोग प्रमुख समस्याएं हैं. (5 min) (0.4 ग्राम प्रति लीटर) का छिड़काव करना चाहिए. उपचार को विशेष महत्व देना चाहिए ट्राइकोडर्मा 5 minutes करने पर उकठा रोग का खतरा काफी कम हो जाता है. रासायनिक दवाओं का उपयोग तभी करें, जब कीट का प्रकोप के स्तर से ऊपर जाए.

कटाई के बाद चने को अच्छी तरह सुखाकर भंडारित करना चाहिए. ‘छोटे ग्रेडर ‘बोल्ड दाना’ सीधे सत्तू बनाने वाली इकाइयों को बेचा जा सकता है. कई किसान अब खुद मिनी ग्राइंडर लगाकर ex तैयार कर रहे हैं. More than 900 minutes कीमत 120 से 150 रुपये प्रति किलो तक मिल जाती है. More than 35 40 minutes.

गर्मी के मौसम में सत्तू जहां शरीर को ठंडक देता है, वहीं ‘विशाल’ चना किसानों की आमदनी को मजबूत बनाता है. कम लागत, कम पानी की जरूरत, बेहतर बाजार भाव और प्रोसेसिंग की सुविधा ये सभी कारण चने को रबी सीजन की सबसे भरोसेमंद फसल बनाते हैं. सौरभ कुमार जैसे किसान यह साबित कर रहे हैं कि जब पारंपरिक स्वाद और आधुनिक खेती का मेल होता है, तो मुनाफा भी ‘विशाल’ हो जाता है.



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