दुधवा नेशनल पार्क में अब खूब दिखेंगे एक सींग वाले गेंडे, जानिए कितनी हुई संख्या, 1984 और नेपाल से लाए थे गैंडे & more related news here

दुधवा नेशनल पार्क में अब खूब दिखेंगे एक सींग वाले गेंडे, जानिए कितनी हुई संख्या, 1984 और नेपाल से लाए थे गैंडे

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दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों की संख्या बढ़ी.

दुधवा नेशनल पार्क में गैंडों की संख्या बढ़ी. (Photo credit; ETV Bharat)

लखीमपुर खीरी : दुधवा नेशनल पार्क का ‘राइनो जोन’ गैंडों को खूब भा रहा है. उनके कुनबे में भी बढ़ोतरी भी हो रही है. 2026 की मौजूदगी दर्ज की गई है. पिछले साल गैंडों की संख्या 48 थी. दुधवा टाइगर रिजर्व देश का ऐसा अनोखा संरक्षित क्षेत्र है, जहां बाघ, हाथी, भालू के साथ-साथ एक सींग वाले भारतीय गैंडों का भी सफल संरक्षण और पुनर्वास किया जा रहा है.

25 27 जून के बीच गैंडों की गणना कराई गई. गणना पूरी होने के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दुधवा में 17 नर, 25 मादा तथा 11 अवयस्क और बच्चे सहित कुल 53 गैंडे मौजूद हैं. इनमें स्वच्छंद रूप से विचरण कर रहे आठ गैंडे भी शामिल हैं.

दुधवा देश का तीसरा ऐसा क्षेत्र है जहां एक सींग वाले भारतीय गैंडे पाए जाते हैं. इसके अलावा केवल असम और पश्चिम बंगाल में ही इनकी प्राकृतिक आबादी मौजूद है. ऐसे में दुधवा में की बढ़ती संख्या उत्तर More information है.

1984 में हुई थी. असम और नेपाल से सात को लाकर दक्षिण सोनारीपुर रेंज के ककरहा क्षेत्र में बसाया गया था. 2018 में बेलरायां रेंज के भादी Learn more गया, जहां चार गैंडों को छोड़ा गया.

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवंबर 2024 में विजय श्री और दीपिका, 2025 में ख रिद्धि, जबकि 2026 में हर्ष, दीप्ति, सुषमा और राशि नामक चार गैंडों को पर्यटन क्षेत्र में स्वच्छंद विचरण के लिए छोड़ा गया. More information हैं.

हालांकि बीते वर्ष आपसी संघर्ष और हिंसक वन्यजीवों के हमले में हिमांशु, कल्पना का एक शावक तथा राजेश्वरी की मौत हुई थी. बावजूद इस वर्ष कुल पांच गैंडों की बढ़ोतरी दर्ज होना संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता माना जा रहा है.

दुधवा टाइगर रिजर्व प्रभाग के उपनिदेशक जगदीश आर. ने बताया है कि दुधवा में गैंडों की संख्या का 53 min. यह वन विभाग की सतत निगरानी, वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है. हमारा लक्ष्य गैंडों के सुरक्षित आवास, बेहतर संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन को लगातार बढ़ावा देना है, ताकि आने वाले वर्षों में इनकी संख्या और अधिक बढ़ सके.

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