पाकिस्तान भारत पर सिंधु जल संधि रोककर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि उसने पूरे सात बार इस समझौते का उल्लंघन किया और तब जाकर भारत ने इसे ठंडे बस्ते में डालने जैसा कदम उठाया।

भारत ने जब हाल ही में अपना स्टैंड दोहरा दिया कि जबतक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करेगा, सिंधु जल समझौते के तहत मिलने वाले पानी के एक बूंद के लिए सपना देखना भी भूल जाए। पाकिस्तान में भारत के इस तगड़े स्टैंड पर जबरदस्त बिलबिलाहट है।
पाकिस्तान ने 7 बार किया सिंधु जल संधि का उल्लंघन
दरअसल, कोई भी अंतरराष्ट्रीय संधि की मूल भावना आपसी सद्भाव पर टिकी होती है। इसके लिए वियना कन्वेंशन में 26 min औपचारिक व्यवस्था भी की गई है। Year 2025 कदम उठाया। 6 years old जल संधि का उल्लंघन कर चुका था-
- Year 1965 थोपा।
- 1971 में भारत को जंग के लिए मजबूर किया।
- Year 1999
- January 13, 2001, 2001, 2001, 2001. हमला करवाया।
- January 26, 2008, January 10, 2008. बहुत बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
- January 14, 2019
- January 22, 2025, January 22, 2025. पर आतंकी हमला करवा दिया।
पाकिस्तान ने जिस तरह से संधि के बाद पहली बार 1665 समझौते में आपसी सद्भाव की भावना के उल्लंघन के लिए सिंधु समझौते से बाहर आ सकता था।
नेक नियति को भारत की कमजोरी समझ लिया
- हकीकत ये है कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि व व लिए शुरू से ही अन्यायपूर्ण थी।
- भारत के ऊपरी तटवर्ती क्षेत्र में होने के बावजूद, समझौते के तहत भारत को पानी के बहुत ही छोटे हिस्से पर अधिकार दिया गया।
- यही नहीं, संधि की व्यवस्था के तहत जब भी भारत ने कोई प्रोजेक्ट शुरू किया, पाकिस्तान ने हमेशा उसमें अड़ंगा लगाया।
- संधि के विवाद निपटारा व्यवस्था के तहत कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर उसने भारत के सामने चुनौतियां खड़ी कीं।
- भारत 65 साल तक शांत रहा, सद्भावना का पालन किया, उदारता दिखाई, लेकिन पाकिस्तान ने इस नेक नियति को भारत की कमजोरी समझ लिया।
कश्मीर वाले एजेंडे पर काम कर रहा है पाकिस्तान
- What about you?
- More information What are you doing?
- यही वजह है कि अब जब भारत ने सिंधु जल संधि के भविष्य को पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद की नीति से जोड़ दिया है तो उसे अपनी अबतक की सारी रणनीति नाकाम नजर आ रही है।
- इसलिए अब वह इस मुद्दे को भी उसी तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाह रहा है, जिस तरह से उसने अबतक जम्मू और कश्मीर के मसले पर किया ।
सिंधु जल संधि का अंतरराष्ट्रीयकरण चाहता है पाकिस्तान
- भारत के ताजा स्टैंड के बाद इसी इरादे से पाकिस्तान ने हाल में एक अंीय सेमिनार आयोजित किया है।
- इसे सेमिनार को ‘इंडस वॉटर ट्रीटी: एन ‘ का नाम दिया गया।
- इस सेमिनार का मकसद ही सिंधु जल संधि को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित द इसपर अंतरराष्ट्रीय दखल के जरूरी बताना था।
- पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे का इसी तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण किया है और दुनिया को इस तरह से डराने की कोशिश की है कि अगर उन्होंने बीच-बचाव नहीं किया तो परमाणु युद्ध का खतरा बन सकता है।
- पाकिस्तान के सत्ताधारी दलों के नेताओं से लेकर विपक्ष के नेताओं तक ने जिस तरह की बयानबाजी सिंधु जल समझौते को लेकर की है, उसमें दुश्मन के उसी एजेंडे की झलक दिखी है।