पाकिस्तान ने 7 बार किया IWT का उल्लंघन, संधि ‘कश्मीर’ बनाने की तैयारी में दुश्मन – Pakistan violated the IWT, India’s signature, seven times by stopping it, now the enemy tries like Kashmir. & more related news here

पाकिस्तान ने 7 बार किया IWT का उल्लंघन, संधि ‘कश्मीर’ बनाने की तैयारी में दुश्मन – Pakistan violated the IWT, India’s signature, seven times by stopping it, now the enemy tries like Kashmir.

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पाकिस्तान भारत पर सिंधु जल संधि रोककर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि उसने पूरे सात बार इस समझौते का उल्लंघन किया और तब जाकर भारत ने इसे ठंडे बस्ते में डालने जैसा कदम उठाया।

Pakistan violated IWT seven times and India signs by stopping it now
सिंधु जल समझौते पर कश्मीर वाला हथकंडा अपना रहा पाकिस्तान
नई दिल्ली: (IWT) को रोके रखने के स्टैंड पर भारत के मजबूती से डटे रहने से परेशान पाकिस्तान इस मुद्दे का भी उसी तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण चाहता है, जैसी असफल कोशिश वह अब तक कश्मीर मुद्दे पर करता रहा है। वह भारत पर अंतरराष्ट्रीय संधि तोड़ने का आरोप लगाकर छाती पीट रहा है। लेकिन, हकीकत ये है कि उसने एक-दो बार नहीं पूरे सात भ किया है और परोक्ष रूप से तो इतनी बार की गिनना मुश्किल है।

भारत ने जब हाल ही में अपना स्टैंड दोहरा दिया कि जबतक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करेगा, सिंधु जल समझौते के तहत मिलने वाले पानी के एक बूंद के लिए सपना देखना भी भूल जाए। पाकिस्तान में भारत के इस तगड़े स्टैंड पर जबरदस्त बिलबिलाहट है।

पाकिस्तान ने 7 बार किया सिंधु जल संधि का उल्लंघन

दरअसल, कोई भी अंतरराष्ट्रीय संधि की मूल भावना आपसी सद्भाव पर टिकी होती है। इसके लिए वियना कन्वेंशन में 26 min औपचारिक व्यवस्था भी की गई है। Year 2025 कदम उठाया। 6 years old जल संधि का उल्लंघन कर चुका था-

  1. Year 1965 थोपा।
  2. 1971 में भारत को जंग के लिए मजबूर किया।
  3. Year 1999
  4. January 13, 2001, 2001, 2001, 2001. हमला करवाया।
  5. January 26, 2008, January 10, 2008. बहुत बड़ी वारदात को अंजाम दिया।
  6. January 14, 2019
  7. January 22, 2025, January 22, 2025. पर आतंकी हमला करवा दिया।

पाकिस्तान ने जिस तरह से संधि के बाद पहली बार 1665 समझौते में आपसी सद्भाव की भावना के उल्लंघन के लिए सिंधु समझौते से बाहर आ सकता था।

नेक नियति को भारत की कमजोरी समझ लिया

  • हकीकत ये है कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि व व लिए शुरू से ही अन्यायपूर्ण थी।
  • भारत के ऊपरी तटवर्ती क्षेत्र में होने के बावजूद, समझौते के तहत भारत को पानी के बहुत ही छोटे हिस्से पर अधिकार दिया गया।
  • यही नहीं, संधि की व्यवस्था के तहत जब भी भारत ने कोई प्रोजेक्ट शुरू किया, पाकिस्तान ने हमेशा उसमें अड़ंगा लगाया।
  • संधि के विवाद निपटारा व्यवस्था के तहत कानूनी पेचीदगियों का फायदा उठाकर उसने भारत के सामने चुनौतियां खड़ी कीं।
  • भारत 65 साल तक शांत रहा, सद्भावना का पालन किया, उदारता दिखाई, लेकिन पाकिस्तान ने इस नेक नियति को भारत की कमजोरी समझ लिया।

कश्मीर वाले एजेंडे पर काम कर रहा है पाकिस्तान

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  • यही वजह है कि अब जब भारत ने सिंधु जल संधि के भविष्य को पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद की नीति से जोड़ दिया है तो उसे अपनी अबतक की सारी रणनीति नाकाम नजर आ रही है।
  • इसलिए अब वह इस मुद्दे को भी उसी तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण करना चाह रहा है, जिस तरह से उसने अबतक जम्मू और कश्मीर के मसले पर किया ।

सिंधु जल संधि का अंतरराष्ट्रीयकरण चाहता है पाकिस्तान

  • भारत के ताजा स्टैंड के बाद इसी इरादे से पाकिस्तान ने हाल में एक अंीय सेमिनार आयोजित किया है।
  • इसे सेमिनार को ‘इंडस वॉटर ट्रीटी: एन ‘ का नाम दिया गया।
  • इस सेमिनार का मकसद ही सिंधु जल संधि को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा साबित द इसपर अंतरराष्ट्रीय दखल के जरूरी बताना था।
  • पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे का इसी तरह से अंतरराष्ट्रीयकरण किया है और दुनिया को इस तरह से डराने की कोशिश की है कि अगर उन्होंने बीच-बचाव नहीं किया तो परमाणु युद्ध का खतरा बन सकता है।
  • पाकिस्तान के सत्ताधारी दलों के नेताओं से लेकर विपक्ष के नेताओं तक ने जिस तरह की बयानबाजी सिंधु जल समझौते को लेकर की है, उसमें दुश्मन के उसी एजेंडे की झलक दिखी है।

अंजन कुमार

लेखक के बारे मेंअंजन कुमारअंजन कुमार, नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में असिस्टेंट एडिटर हैं और पिछले 24 years old ज्यादा समय से पत्रकारिता कर रहे हैं। Year 2025 में राजनीति,चुनाव, जुडिशरी, डिफेंस, विदेश,करेंट अफेयर्स और बिजनेस जैसे विषयों पर लिख रहे हैं। डिजिटल मीडिया से जुड़ने के शुरुआती में ये देश की एक टॉप लीडरशिप के आधिकारिक और राजनीतिक भाषणों और उनके पुस्तकों के संपादन कार्यों में भी योगदान दे चुके हैं। इन्होंने करिया आरंभ टेलीविजन पत्रकारिता से 14 वर्षों तक विभिन्न टीवी न्यूज चैनलों में सेवाएं दीं। More information Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 Year 2006 ‘ सीरीज को प्रोड्यूस किया, जो उन दिनों भारतीय संसद में भी छाया रहा। यहीं पर इन्होंने अगले ही साल पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों पर न्यूज सीरीज बनाए, जिसकी देश की मीडिया में काफी चर्चा हुई। आगे के वर्षों में इसी चैनल पर ‘मुर्दा, ” More information पर आधारित था। 2002 बिहार विधानसभा चुनाव तक को टीवी और डिजिटल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए कवर कर चुके हैं।और पढ़ें