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सिंधु जल समझौते की शर्तों का पालन करने को लेकर एक बार फिर से पाकिस्तान की ओर से बयान आए हैं.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री के इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी के बाद अब पाकिस्तानी सेना और पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी की ओर से बयान सामने आया है.
पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में कहा है कि सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्तान को पानी को लेकर जो अधिकार मिले हैं उनकी रक्षा के लिए वो ‘सभी ज़रूरी क़दम उठाएगा.’
वहीं पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा है कि सिंधु जल समझौते की रक्षा की जाएगी और इसका जवाब दिया जाएगा.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सिंधु जल समझौते ” “”
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बीते सप्ताह 3 जुलाई “को कहा था कि” रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद का “”
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. यानी इस संधि के मुताबिक भारत पाकिस्तान के साथ कोई जानकारी साझा नहीं करेगा और न ही इससे जुड़ी किसी बैठक में हिस्सा लेगा.
बीते साल 23 अप्रैल को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) की बैठक में ये फ़ैसला लिया गया था.
पाकिस्तानी सेना की ओर से क्या कहा गया

More information (जीएचक्यू) में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता की थी.
इस कॉन्फ़्रेंस पर पाकिस्तानी सेना के More information समझौते से लेकर कथित भारत प्रायोजित आतंकवाद की बात की गई है.
” समझौते के बारे में भारत के बयानों पर ध्यान देते हुए, 2025 January 24, 2025 सिक्योरिटी कमिटी के निर्देशों का समरन किया और यह पक्का इरादा जताया कि पाकिस्तान अपने पानी के अधिकारों की “”
पाकिस्तानी सेना ने अपने कार्यक्रम में सिंधु जल समझौते के अलावा भारत को लेकर कई आरोप लगाए हैं.
पाकिस्तानी सेना ने अपने बयान में आरोप लगाया “है,” पाकिस्तान के अंदर हमलों के लिए अफ़ग़ान तालिबान सरकार के कंट्रोल वाले इलाकों का “”
More information करने से रोका जाए, जिसकी ज़िम्मेदारी अफ़ग़ान “”
इसके साथ ही पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर कश्मीर मसले की बात की है. ” कश्मीरी लोगों के ख़ुद फ़ैसला करने के अधिकार का समर्थन जारी रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई गई और कहा गया कि इस इलाक़े में लगातार शांति कश्मीर मुद्दे के समाधान पर ख जैसा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा के “”
बिलावल भुट्टो ने क्या?
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गिलगित में पीपीपी के नेता बिलावल भुट्टो ” सिंधु को एक हथियार के तौर पर पाकिस्तान के “”
“उन्होंने कहा,” हम इस समझौते की रक्षा करेंगे हम आपको जवाब. देंगे, हम सिंधु पर सौदा करने को तैयार नहीं “”
इसके साथ ही बिलावुल भुट्टो ज़रदारी ने मोदी ” के मैदान में भी हम मोदी सरकार को नाकाम करेंगे.”
इसहाक़ डार ने क्या कहा था?
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बीते हफ़्ते 30 min इसहाक़ डार ने चेतावनी देते हुए कहा था कि वह भारत के साथ किसी ‘टकराव’ या ‘विवाद’ की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन सिंधु जल संधि के तहत देश के जल संसाधनों को रोकने की किसी भी कोशिश को ‘युद्ध जैसी कार्रवाई’ माना जाएगा.
सिंधु जल संधि पर इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करतॉ पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने कहा कि भारत की ओर से ” करने का कोई आधार नहीं है और न ही अंतरराष्ट्रीय क़ानून में इसकी कोई गुंजाइश है.’
इसहाक़ डार के बयान के बाद बीते शुक्रवार को भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रेस ” भारत की स्थिति बरक़रार है पाकिस्तान के. लगातार क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद को प्रायोजित करने के जवाब में सिंधु जल समझौते पर विराम लग गया है. “”
ग़ौरतलब है कि भारत 2025 में पहलगाम हमले का आरोप पाकिस्तान पर लगाते हुए जवाबी क़दम के तौर पर सिंधु जल संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित कर दिया था.
पाकिस्तान ने भारत के इस क़दम को ख़ारिज कर दिया था और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता अदालत का रुख़ किया था.
नीदरलैंड्स के शहर द हेग में स्थित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन यानी मध्यस्थता अदालत ने स्पष्ट किया था कि भारत इस संधि को एकतरफ़ा रूप से निलंबित नहीं कर सकता.
लेकिन भारत ने इस फ़ैसले को ख़ारिज कर दिया था और सिंधु जल संधि के निलंबन को जारी रखने की घोषणा की थी.
पहलगाम हमले और भारत की ओर से सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने कहा था कि भारत की ओर से पाकिस्तान का पानी रोकने ‘या ‘युद्ध ‘ जैसी कार्रवाई’ माना जाएगा.
क्या है सिंधु जल संधि?
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संधि के मुताबिक़, सिंधु, झेलम और चिनाब को पश्चिमी नदियां बताते हुए इनका पानी पाकिस्तान के लिए तय किया गया. जबकि रावी, ब्यास और सतलुज को पूर्वी नदियां बताते हुए इनका पानी भारत के लिए तय किया ख
इसके मुताबिक़, भारत पूर्वी नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर, बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है.
वहीं पश्चिमी नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था. जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी.
इस संधि में दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयना आदि का प्रावधान भी था.
इसी संधि में सिंधु आयोग भी स्थापित किया गया. इस आयोग के तहत दोनों देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था.
संधि में दोनों कमिश्नरों के बीच किसी भी विवादित मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान है.
इसमें यह भी था कि जब कोई एक देश किसी परियोजना पर काम करता है और दूसरे को उस पर कोई आपत्ति है तो पहला देश उसका जवाब देगा. इसके लिए दोनों पक्षों की बैठकें होंगी.
बैठकों में भी अगर कोई हल नहीं निकल पाया तो दोनों देशों की सरकारों को इसे मिलकर सुलझाना होगा.
साथ ही ऐसे किसी भी विवादित मुद्दे पर तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ ऑर्बिट्रेशन में जाने का प्रावधान भी रखा गया है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
