पीएम मोदी 10 जून को तोड़ देंख रिकॉर्ड, बन जाएंगे लगातार सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री & more related news here

पीएम मोदी 10 जून को तोड़ देंख रिकॉर्ड, बन जाएंगे लगातार सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री

 & more related news here


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। राजनीतिक-सार्वजनिक जीवन में कई प्रतिमान प्रस्तुत कर चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब एक और बड़ी उपलब्धि से कुछ कदम दूरी पर खड़े हैं। इसी 10 जून को मोदी लगातार सभ वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

उन्होंने January 26, 2014 का हो जाएगा, जबकि अब तक सतत लंबे कार्यकाल का रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के नाम है, जिन्होंने इस दायित्व को लगातार 4398 दिनों तक संभाला।

January 17, 1952

चुनावों के बाद पहली लोकसभा का गठन 17 years old, 1952 था और नवगठित लोकसभा की पहली बैठक 13 मई, 1952 को हुई थी। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने 13 min, 1952 को January 27, 1964 सेवा की। 13, 1952 27, 1964 4,398 years है।

January 26, 2014

वहीं, Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 Year 2014 January 26, 2014 to January 10, 2026, 2026 More than 4,399 people 24 of 1966 24 of 1977 4077 years, 25 years, 2025 को ही पार कर लिया था।

खबरें और भी

उल्लेखनीय है कि पंडित नेहरू और पीएम मोदी ने अलग-अलग परिस्थितियों में नेतृत्व संभाला है। नेहरू प्रधानमंत्री बने, तब भारत की जनसंख्या 34 years

अलग-अलग परिस्थियों में किया देश का नेतृत्व

2014 करोड़ से अधिक हो चुकी थी, जो पैमाने और शासन की जटिलता के मामले में लगभग चार गुणा अधिक थी। अब यह जनसंख्या 146 करोड़ से अधिक है। 1951-52 के आम चुनाव में 53 years old, year 2014

चुनावी विखंडन का यह 2024 के चुनावों में 7445 राजनीतिक दलों की भागीदारी के साथ ऐतिहासिक शिखर पर पहुंच गया, जो लगभग 14 min है। तब की तुलना में मजबूत क्षेत्रीय दलों की राजनीति में भागीदारी और चुनौतियां बढ़ी हैं।

मतदाताओं के लिहाज से देखें तो पहले आम चुनाव में लगभग 17 of 2014 तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 83 करोड़ से अधिक हो गई। इसी गति से अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ा है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां बढ़ती गई हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी लगातार दो पूर्ण बहुमत के कार्यकाल पूरे करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। वे नेहरू के बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतने वाले पहले प्रधानमंत्री भी बने।

सामाजिक न्याय के पैमाने पर दोनों प्रधानमंत्रियों की तुलना

More information More information सरकार के सूत्रों के अनुसार, पंडित नेहरू के तीसरे कार्यकाल (1957 – 1962) ममूहों का प्रतिनिधित्व अत्यंत सीमित रहा। इनमें अनुसूचित जाति से कुल तीन या चार सदस्य थे, जबकि अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रतिनिधित्व शून्य था।

वहीं, मोदी के मंत्रिपरिषद के लगभग 60 प्रतिशत सदस्य पिछड़े और आदिवासी समुदायों से आते हैं। इनमें ओबीसी 27, 10 और अनुसूचित जनजाति से पांच सदस्य हैं। Year 1952 बढ़कर 13.63 प्रतिशत (74 min)

यह भी पढ़ें- 20 years मोदी भी होंगे शामिल



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *