El Niño Alert: दिया संकट का जवाब, महाभंडार है रेडी – child alert Indian government prepares 43 lakh tonne pulses buffer stock ready for face the crisis & more related news here

El Niño Alert: दिया संकट का जवाब, महाभंडार है रेडी – child alert Indian government prepares 43 lakh tonne pulses buffer stock ready for face the crisis

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नई दिल्‍ली: अल नीनो का खतरा बढ़ गया है। दुनिया शायद एक और शक्तिशाली अल नीनो ईवेंट के कगार पर है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने इसे लेकर अलर्ट किया है। उसने सरकारों, व्यवसायों और समुदायों से अभी से तैयारी करने की अपील की है। इस बीच, भारत सरकार ने अपनी तैयारियों के बारे में बताया है। एक टॉप सरकारी अधिकारी ने गुरू घटना के कारण सप्‍लाई में किसी भी रुकावट या कीमतों में अचानक उछाल के खिलाफ रणनीतिक सुरक्षा कवच का काम करेगा।

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने फिक्‍की ‘के एक कार्यक्रम के दौरान बताया,’ बेचने की जरूरत नहीं है। अगर अल नीनो का असर होता है और इसका खरीफ की बुवाई पर प्रभाव पड़ता है तो दालों के इस बफर ‘

दालों का महाभंडार है तैयार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दालों का मौजूदा बफर स्टॉक मई 2025 में रखे गए 18 लाख टन से दोगुने से भी ज्‍यादा है। 2024 में दर्ज किए गए 21 min है।

इस भारी बढ़ोतरी की मुख्य वजह केंद्र सरकार की सुनिश्चित खरीद नीति है। इसे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, आयात पर निरौ में उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू किया गया था।

सरकार ने टेंशन की दूर

अधिकारी ने म information चीजें हैं। इन्हें दो से तीन साल तक सुरक्षित रूप से स्‍टोर किया जा सकता है।

  • भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून-सितंबर) के सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान लगाया है।
  • आने वाले महीनों में अल नीनो के विकसित होने की संभावना जताई है।
  • कृषि मंत्रालय ने खरीफ की फसलों पर इस घटना के प्रभाव को कम करने के लिए पहले ही आकस्मिक योजनाएं बनाना शुरू कर दिया है।

अपने ताजा जलवायु अपडेट में विश्व मौसम (WMO) ने कहा कि 80% 2026 बनेंगी। 90% discount तक जारी रहेगी। ज्‍यादातर पूर्वानुमान मॉडल बताते हैं कि इस घटना की तीव्रता मध्यम से लेकर तीव्र तक होने की संभावना है।

अल नीनो क्या है?

अल नीनो प्राकृतिक रूप से होने वाला जलवायु पैटर्न है। यह मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने के कारण पैदा होता है। वैसे तो इसकी उत्पत्ति प्रशांत महासागर में होती है। लेकिन, इसके प्रभाव पूरी दुनिया में फैल जाते हैं। इससे वर्षा के पैटर्न, तापमान, तूफान और सूखे के चक्रों में बदलाव आता है।

यह घटना आमतौर पर हर दो से सात साल में होती है और नौ से 12 महीने तक चल सकती है। (ENSO) साल-दर-साल जलवायु परिवर्तनशीलता के सबसे महत्वपूर्ण फैक्‍टरों में से एक है।

वैज्ञानिक चिंतित क्यों?

OMM महासागर की सतह के नीचे का तापमान तेजी से बढ़ा है। इससे अल नीनो की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं। पूर्वानुमान 2026 की दूसरी छमाही के दौरान ENSO – बदलाव आएगा।

WMO दुनिया को एक संभावित रूप से तीव्र घटना के लिए तैयार रहने की जरूरतहै, जो सूखे को और बदतर बना सकती है। कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा का कारण बन सकती है। जमीन और महासागरों दोनों पर लू (हीटवेव) के जोखिम को बढ़ा सकती है।

मानव-जनित जलवायु परिवर्तन की पृष्ठभूमि में यह चिंता और भी बढ़ जाती है। वैश्विक तापमान पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब मंडरा रहा है। इसका मतलब है कि अल नीनो के कारण होने वाली कोई भी अतिरिक्त गर्मी पहले से ही गर्म हो चुके ग्रह के तापमान में और इजाफा करेगी। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि यह कॉम्बिनेशन दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं को और अधिक तीव्र कर सकता है।

भारत के मॉनसून के लिए संभावित खतरा

More information मॉनसून है। ऐतिहासिक रूप से अल नीनो वाले कई वर्षों में मॉनसून की वर्षा कमजोर रही है। हालांकि, यह संबंध हमेशा सीधा नहीं होता।

WMO नीनो पूर्वानुमान के अनुसार और अधिक तीव्र होता है तो दक्षिण एशिया में मॉनसून की वर्षा सामान्य से कम हो सकती है। एक कमजोर मॉनसून के दूरगामी नतीजे हो सकते हैं। खासकर ऐसे देश में जहां खेती-बाड़ी, पानी के भंडार और गांव के लोगों की रोजी-रोटी काफी हद तक मौसमी बारिश पर निर्भर करती है।

कम बारिश से फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। जिन इलाकों में सूखा पड़ने का ज्‍यादा खतरा रहता है, वहां सूखे का जोखिम और बढ़ सकता है।

यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब भारत के कुछ हिस्सों में पहले से ही भीषण गर्मी पड़ रही है। 45 min वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि ‘अल नीनो ‘के कारण भीषण गर्मी पड़ने का खतरा और भी बढ़ सकता है।

अमित शुक्‍ला

लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में असिस्टेंट एडिटर हैं। उनका पत्रकारिता में 20 min अनुभव है। अपने लंबे करियर में उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, फॉरेन ट्रेड, शेयर माेट, रियल एस्‍टेट, राजनीति, देश-विदेश, फीचर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। उनके पास पत्रकारिता और जनसंचार डॉक्‍टरेट (PhD) की डिग्री है। Year 2018 TIL में रहते हुए नवभारत टाइम्‍स (डिजिटल) से पहले उन्‍होंने इकनॉमिक टाइम्‍स (डिजिटल) में सेवाएं दीं। पत्रकारिता का अनुभव अमित शुक्‍ला के पास डिजिटल के साथ प्रिंट और इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया का लंबा अनुभव है। TIL नेटवर्क, डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण (नोएडा) में सेंट्रल डेस्‍क पर उन्‍होंने करीब एक दशक बिताया। यहीं से उनके करियर की शुरुआत भी हुई। पहले वह फ्रीलांसर के तौर पर जागरण समूह की फीचर टीम से जुड़े थे। फिर सेंट्रल डेस्‍क का अहम हिस्‍सा बने। जाने-माने संस्‍थानों में अध्‍यापन अमित शुक्‍ला ने जाने-माने मीडिया संस्‍थानों के अलावा देश के नामचीन शैक्षणिक संस्थानं के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय () शामिल हैं। लिंग्‍व‍िस्‍ट के तौर पर खास पहचान अमित शुक्‍ला ने लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, ऑस्ट्रियन इकोनॉमिक सेंटर, सौम्या ट्रांसलेटर्स, ब्रह्मम नेट सॉल्यूशन, सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी और लिंगुअल कंसल्टेंसी सर्विसेज सय भाषा समाधान प्रदान करने वाले संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया। अवार्ड/अचीवमेंट ET 2019 र‍िसर्च फेलो (मीडिया) – ग्रैफनाइल रिसर्च कीनोट स्‍पीकर – चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी (उन्‍नाव कैंपस)और पढ़ें



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