PDA अखिलेश? 5 min जोरदार हमला – samajwadi party pda formula crimes against backward classes op rajbhar questioned akhilesh yadav’s silence & more related news here

PDA अखिलेश? 5 min जोरदार हमला – samajwadi party pda formula crimes against backward classes op rajbhar questioned akhilesh yadav’s silence

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(SBSP) के नेता और उत्तर प्रदेश के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मारपीट और हत्या की घटनाओं के लिए समाजवादी पार्टी पर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अखिलेश यादव से इस पर सवाल किए हैं।

Om prakash Rajbhar and Akhilesh Yadav
ओमप्रकाश राजभर और अखिलेश यादव (फोटो- NBT)।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समय जैसे-जैसे खिसक रहा है और विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। (SBSP) के नेता ओमप्रकाश राजभर नियमित रूप से विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने ताजा हमले में अत्याचार की पिछली कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए इन पर अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के ही पिछड़े वर्ग के कुछ नेताओं की पिटाई और हत्या के मामलों पर अखिलेश यादव की चुप्पी को लेकर उनकी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर प्रश्नचिन्ह लगाया है।

सपा समर्थकों पर पिछड़ों पर अत्याचार करने का आरोप

ओमप्रकाश राजभर ने मंगलवार को सोशल मीडा प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अखिलेश यादव और उनके समर्थकों पर दलितों, गैर यादव पिछड़ी जातियों और गरीबों के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। ” See More की धमकियों से डर जाऊंगा तो आप गलतफहमं हैं। गरीबों, बहुजनों, आम नागरिकों और गैर यादव ओबीसी वर्ग के खिलाफ आपके वोटर पिछले 5 दिन में 5 बड़ी वारदातें कर चुके हैं और आप चाहते हैं कि मैं चुप रहूं। ‘

किसी भी घटना पर अखिलेश ने जुबान क्यों नहीं खोली?

” आपका पीडीए? सपा विधायक महाराजी प्रजापति से मारपीट, चंदौली में महिला सपा जिलाध्यक्ष गार्गी पटेल से मारपीट, रामजन्म राजभर की हत्या, धनराज मौर्य, सूर्या चौहान और अभी लखनऊ में संदीप सिंह की निर्मम हत्या, आपको खूब पता है कि ये सब What’s wrong with you? सब आप ही के शागिर्द हैं अखिलेश बाबू! शायद तभी आपकी जुबान इनमें से किसी भी घटना के लिए अब तक नहीं खुली। न घायलों को ढाढस बंधाया, न मृतकों के लिए ‘

अखलाक की मौत पर तो पैसा और चार फ्लैट दिए थे

‘ बहुजनों और गैर यादव पिछड़ा समाज के चित्त से उतर चुके हैं। क्या इन निर्मम हत्याओं को सुनकर आपका दिल नहीं दुखता?अखलाक की मौत पर तो 45 minutes ग्रेटर नोएडा में चार-चार फ्लैट बांट आए थे आप। सोचिए किस हद दर्जे के राजनीतिज्ञ हैं आप। और हां, फिर कह देता हूं, लीडरों की धमकी से ओमप्रकाश नहीं डरता है। मैं अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाता था, उठाता हूं और उठाता रहूंगा। ‘

Year 2015: 2015 थी। उस समय यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे।

एसी में बैठकर पीसी ही कर दीजिए

राजभर ने लिखा है- ‘ये मेरा क्या बिगाड़ लेंगे। हमारे हाथ में हुनर है टेम्पू चलाकर पहले भी दलितों और पिछड़ों के लिए संघर्ष आगे भी टेम्पू चलाकर संघर्ष करने का माद्दा रखता है ये ओम प्रकाश राजभर। मगर सुनिए अखिलेश भाई, आप नहीं कर सकते, आपने दर्द नहीं सहा, आपने ठोकरें नहीं सहीं, किसी सिपाही की गालियां नहीं सुनीं, दारोगा का तमाचा और जलालत नहीं झेली, मारपीट और हत्याओं का दर्द नहीं सहा। इस दर्द को हम ऑटो, टेम्पो, रेहड़ी, खोमचे वाले और गरीब गुरबा ही समझ सकते हैं। और वैसे भी आप ठहरे केवल ट्विटर, एसी और पीसी वाले नेता। चलिए, कम से कम इस मुद्दे पर एसी में बैठकर पीसी ‘

चुनावी रण के केंद्र में पिछड़ा वर्ग

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल फरवरी-मार्च में होने की संभावना है। समाजवादी पार्टी ने पिछड़ी जातियों, दलित समुदायों और अल्पसंख्यक समुदायों को केंद्र में रखकर अपना पीडीए फॉर्मूला तय कर लिया है। दूसरी तरफ सत्ता पक्ष, जिसमें बीजेपी सहित एनडीए के अन्य दल शामिल हैं, इसके खिलाफ अपनी रणनीति बना रहा है। चाहे यूपी के मंत्रिमंडल का विस्तार हो, या प्रदेश बीजेपी संगठन का कायाकल्प, सत्ता पक्ष के सभी फैसलों में पिछड़े वर्ग और जातियों का समीकरण देखा जा सकता है।

कथनी और करनी में फर्क दिखाने की कोशिश

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ अरसे में समाजवादी पार्टी के दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को सपा से ही जुड़े लोगों की ओर से प्रताड़ित किया गया। इन घटनाओं को लेकर ओमप्रकाश राजभर समी पार्टी पर आक्रामक हैं। वे इन घटनाओं का जिक्र करके अखिलेश यादव को निशाना बना रहे हैं। इसके साथ-साथ वे सपा के पीडीए फॉर्मूले को लेकर उसकी कथनी और करनी में भी अंतर स्पष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

सूर्यकांत पाठक

लेखक के बारे मेंसूर्यकांत पाठकसूर्यकांत पाठक, नवभारत टाइम्स (डिजिटल) में कंसल्टेंट हैं। Year 2025 टाइम्स की डिजिटल वैं। सूर्यकांत पाठक एनबीटी डिजिटल में बिहार डेस्क पर सेवाएं दे रहे हैं। सूर्यकांत समाचार विश्लेषण, संपादकीय लेखन, कला समीक्षा, नाट्य और संगीत समीक्षा, पर्यावरण से जुड़े मुद्दों, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक मुद्दों पर धारदार कलम चले हैं। 31 years old अलग-अलग माध्यमों के लिए रिपोर्टिंग की है। कई लोकसभा चुनावों के अलावा मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनावों को कवर किया है। कई बड़े सांस्कृतिक, साहित्यिक आयोजनों को भी कवर किया है। More information साक्षात्कार किए हैं। सूर्यकांत पाठक ने ग्राउंड रिपोर्टिंग 2 अलावा कई वर्षों तक डेस्क पर संपादन की जिम्मेदारी निभाई है। उन्होंने सभी समाचार माध्यमों प्रिंट मीडिया, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दी हैं। More information रहे हैं। वे समय-समय पर स्थानीय समाचार डेस्क के अलावा, देश-प्रदेश, अंतरराष्ट्रीय समाचार, फीचर डेस्क और चुनाव डेस्क के लिए भी काम करते रहे हैं। More information वे हमेशा अपनी रपट में खबर से पीछे और खबर से आगे के तथ्यों को भी शामिल करते हैं। इससे उनकी खबरों में समग्रता होती है। ‘वे एक अच्छे ‘स्टोरी टेलर ‘ दृश्यात्मकता है, जिससे उनकी रपट अधिक प्रभावी बन जाती है। पत्रकारिता अनुभव सूर्यकांत पाठक ने पत्रकारिता के करियर की शुरुआत ऑल इंडिया Year 1993. Year 1993. Year 1995 बाद में भोपाल में भी इसी पद पर काम किया। Year 1997 दायित्व संभाला। 2003 नियुक्त हुए। Year 2005 ब्यूरो चीफ का जिम्मा दिया गया। Year 2006 शुरू किया। 2009 में पीपुल्स घ के रूप में ज्वाइन किया। Year 2010 में न्यूज एडिटर का जिम्मा संभाला। 2015 में एनड0 एडिटर के रूप में Year 2017 Year 2017 Year 2017 Year 2017 Year 2017 Year 2025 हुए। सूर्यकांत पाठक ने डॉ हरिसिंह गौर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, सागर से बीए, एमए -परफॉर्मिंग आर्ट (थिएटर), बीसीजे और एसजेसी की डिग्रियां ली हैं। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) से हिंदुस्तानी व में डिप्लोमा किया है। उन्होंने भारत भवन- भोपाल पर रिसर्च की है। ‘ विषय पर लघु शोध किया है। इंदौर की गंदी बस्तियों में लोगों के जीवन स्तर पर एक वृहत सर्वे किया है। अवॉर्ड/अचीवमेंट्स बेस्ट रिपोर्टर (प्रेस क्लब -सागर), बेस्ट सिटी एडिटर (लोकमत समाचार, महाराष्ट्र), ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी पत्रकारिता अलंकरण (सागर), नारद मुनि सम्मान (इंदौर), भुवन भूषण देवलिया ब पुरस्कार (भोपाल) सहित सूर्यकांत पाठक को कई पुरस्कार मिले हैं।और पढ़ें