Trump tariffs shot down: तिलमिलाए ट्रंप के पास मौजूद है प्‍लान-बी, रीसेट होगी भारत की स्‍ट्रेटेजी – US supreme court decision on tariffs trumps impact on india strategy plan-b ready & more related news here

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नई दिल्‍ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ व्‍यवस्‍था पर हथौड़ा चला दिया है। शीर्ष अदालत ने पूरी पॉलिसी को गैर-कानूनी करार दिया है। ट्रंप इस फैसले से तिलमिला गए हैं। कोर्ट के टैरिफ को रद्द करने वाले फैसले को उन्‍होंने ‘अपमानजनक’ बताया है। राष्‍ट्रपति ने बताया है कि उनका प्रशासन एक ‘बैकअप प्‍लान’ करने में जुट गया है। यह फैसला चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने 6-3 के बहुमत से लिखा। Year 1977 गैर-कानूनी है। ट्रंप के पास अकेले टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। इस फैसले का दूरगामी असर होने वाला है। हाल में भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए एक अंतरिम समझौता किया है। इसमें टैरिफ घटाकर 50% and 18% सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत को अपनी स्‍ट्रैटेजी रीसेट करनी पड़ सकती है। इस फैसले ने बहुत से सवालों को जन्‍म दे दिया है। उदाहरण के लिए अब तक जो अतिरिक्‍त टैरिफ अमेरिका ने वसूला है, उसकी वापसी कैसे होगी। पुरानी व्‍यवस्‍था कब से और कैसे बहाल होगी। आने वाले दिनों में इसका जवाब मिलेगा।

More information इस तरह के व्यापक दायरे के उपायों के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) से स्पष्ट बहुमत की जरूरत होती है। एकतरफा कार्यकारी कार्रवाई से टैरिफ ख लगाए जा सकते हैं। यह फैसला एक ऐसी व्यापार रणनीति के लिए महत्वपूर्ण कानूनी ख में तेजी से टैरिफ लगाने के लिए राष्ट्रपति के अधिकार की व्यापक व्याख्याओं पर निर्भर थी।

ट्रंप प्रशासन दे चुका है प्‍लान-बी का संकेत

इस फैसले के बावजूद अधिकारियों ने संकेत दिया है कि प्रशासन ने लंबे समय से अ तैयार की थीं। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पिछले सितंबर में ही कहा था कि अगर अदालतें आपातकालीन शक्तियों के इस्‍तेमाल को सीमित करती हैं तो वॉशिंगटन के पास ‘कई फॉलबैक विकल्प’ या ‘प्‍लान-बी’ मौजूद हैं।

एक रास्‍ता स्थापित व्यापार कानूनों की ओर बदलाव शामिल है जो अनुचित प्रथाओं या राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों में अ के बाद टैरिफ की अनुमति देते हैं। ये तंत्र धीमे हैं और प5 जरूरत होती है। लेकिन, वे मौजूदा कानून में मजबूती से निहित हैं। पहले स्टील, एल्यूमीनियम और अलग-अलग प्रकार के आयात पर शुल्क को सही ठहराने के लिए इस्‍तेमाल किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सेक्‍टर-स्‍पेसिफिक जांच के जरिये पहले से लगाए गए टैरिफ को नहीं छेड़ता है। अलग-अलग उद्योगों में चल रही जांच अभी भी नए लक्षित शुल्क का कारण बन सकती है, जो अधिकारियों को व्यापार दबाव बनाए रखने के लिए एक संकीर्ण लेकिन कानूनी रूप से मजबूत नजरिये के रूप में दिखाई देता है।

ये भी व‍िकल्‍प खुले हैं

चर्चा के तहत एक और स्‍ट्रेटेजिक टैरिफ को इस , , बजाय इसके कि वे व्यापक रूप से लागू हों। इस तरह की टेलरिंग प्रशासन को कानूनी चुनौतियों के जोखिम को कम करते हुए समान आर्थिक टारगेट का पीछा करने में मदद कर सकती है।

प्रशासन व्यापक टैरिफ शक्तियों के लिए स्पष्ट कांग्रेस प्राधिकरण की भी मांग कर सकता है। हालांकि, राजनीतिक रूप से कठिन और समय लेने वाला है, कानून भविष्य की व्यापार कार्रवाइयों के लिए सबसे मजबूत आधार प्रदान करेगा। कुछ ऐसा जो अदालत ने संकेत दिया है कि दूरगामी उपायों के लिए जरूरी है।

बेस्सेंट ने पहले इस बात पर जोर दिया था कि अगर आपातकालीन शक्तियों का रास्‍ता विफल हो जाता है तो प्रशासन को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाएगा।

ट्रंप की ट्रेड वॉर के ल‍िए झटका है फैसला

More information More information More information करना पड़ रहा है। ट्रंप की रणनीति का उद्देश्य अन्य देशों को व्यापार प्रथाओं को बदलने के लिए मजबूर करना था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला कार्यकी शक्ति की सीमाओं पर रोशनी डालता है, खासकर जब यह कांग्रेस की ओर से अधिकृत शक्तियों के दायरे में आता है। अदालत ने साफ किया है कि इस तरह के व्यापक आर्थिक उपाय, जो बड़ी संख्या में आयातकों और उपभोक्ताओं को प्रभावित करते हैं, को विधायी प्रक्रिया के जरिये स्पष्ट जनादेश की जरूरत होती है।

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अमित शुक्‍ला

लेखक के बारे मेंअमित शुक्‍लाअमित शुक्‍ला, नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं। 18 years old जुड़े हैं। इस दौरान उन्‍होंने बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार, शेयर मार्केट, राजनीति, देश-विदेश, प्रॉपर्टी, करियर जैसे तमाम विषयों को कवर किया है। पत्रकारिता और जनसंचार में PhD करने वाले अमित शुक्ला 7 साल से भी ज्‍यादा समय से टाइम्‍स इंटरनेट लिमिटेड के साथ जुड़े हैं। टाइम्‍स इंटरनेट में रहते हुए नवभारतटाइम्‍स डॉठ सेवाएं दीं। उन्‍होंने टीवी टुडे नेटवर्क , डीएलए जैसे मीडिया संस्‍थानों के अलावा शैक्षणिक संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें शिमला यूनिवर्सिटी- एजीयू, टेक वन स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय () शामिल हैं। लिंग्विस्‍ट के तौर पर भी पहचान बनाई है। मार्वल कॉमिक्स ग्रुप, सौम्या ट्रांसलॆ ब्रूशन, सेंटर फॉर सिविल संगठनों के साथ फ्रीलांस काम किया।और पढ़ें



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