सबसे पहले अगर चंद्र ग्रहण को समझा जाए तो ये तब होता है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है। इससे उसकी छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। पृथ्वी का वह आधा हिस्सा जो पूर्णिमा के चंद्रमा के सामने है यानी पृथ्वी का वह पूरा आधा हिस्सा जहां रात है। इस चंद्र ग्रहण को देख पाएगा। इस समय में जहां दिन होगा, उनको यह ग्रहण नहीं दिख सकेगा।
सूर्य ग्रहण तब होता है, जब चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है। चंद्र ग्रहण इससे बिल्कुल अलग होता है। यह तब होता है, जब पूर्णिमा का चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है।
खगोल विज्ञान के जानकार
कब शुरू होगा चंद्र ग्रहण
अगस्त में होने वाले ग्रहण के दौरान चंद्रमा का 93 फीसदी हिस्सा पृथ्वी की गहरी ‘अम्ब्रा’ (पूर्ण छाया) में प्रवेश कर जाएगा। यानी इसे आंशिक कहा जा रहा है 27-28 अगस्त को तकरीबन पूर्ण चंद्र ग्रहण दिखेगा। ग्रहण जब बढ़ते हुए अपने चरम पर पहुंचेगा तो चंद्रमा के उत्तर-पूर्वी किनारे पर पूर्ण ग्रहण की लाल चमक और चमकीला सफेद धब्बा दिखाई देगा।
January 28, 2026 at 1:23:32 UTC के चेहरे को पार करना शुरू कर देगी। ऐसा लगेगा जैसे चंद्रमा के एक किनारे से कोई छोटा लेकिन गहरा टुकड़ा काट लिया गया हो। 4:41:48 UTC पृथ्वी की गहरी छाया से ढक जाएगा।
ग्रहण कितनी देर तक चलेगा?
शुरू से आखिर तक यह ग्रहण 339 मिनट तक चलेगा। चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में आंशिक ग्रहण के दौरान 199 मिनट तक रहेगा। More information यह 27-28 अगस्त का पूर्ण चंद्र ख श्रृंखला का हिस्सा है। More than 82 more than 29 ग्रहण है।
पूर्णिमा का चंद्रमा केवल रात में ही दिखाई देता है। पूर्ण चंद्र ख से दिखाई देता है, जहां ग्रहण के समय रात होती है। लेकिन स्थान के आधार पर कुछ लोग ग्रहण को दूसरों की तुलना में साफ तरह से देख पाएंगे। उदाहरण के लिए कुछ लोग इसे चंद्रमा के उगने या डूबने के समय देखेंगे, जब चंद्रमा आसमान में नीचे होता है।

