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बिहार के भोजपुर ज़िले के भरत भूषण तिवारी के ‘एनकाउंटर’ का मामला लगातार सुर्ख़ियों में है.
भरत तिवारी के फ़ेसबुक लाइव, सरेंडर के दावे ‘ ‘ दिया है.
ऐसे में ये सवाल उठता है कि आख़िर कौन थे भरत ” क़ानूनी तौर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
शाहपुर के जवइनियां गाँव में हमारी कोशिश इस सवाल के तह तक पहुंचने की थी.
गाँव के मुहाने पर भरत तिवारी की तस्वीर के साथ एक बड़ा बोर्ड लगाया गया है. जिस पर लिखा है- ‘शहीद भरत नगर जवइनियां, आपका ”
यहां के ग्रामीण कहते हैं कि यह नाम भरत तिवारी की श्रद्धांजलि में लोगों ने रखा ै.
ये वही गाँव है जहाँ बीती 17 जे भरत तिवारी का ‘एनकाउंटर’ किया, जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
हालांकि भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस “रिलीज़ के अनुसार,” की सुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पाँव में लगी.”
जवइनियां गाँव के लोग पुलिस के इस दावे को ग़लत बताते हैं.
इन गांव वालों का कहना है कि अगर भरत तिवारी ने इस गांव के लिए आवाज़ नहीं उठाई होती तो शायद पुनर्वास, बिजली और पानी के मुद्दे भी सामने नहीं आते.
कई गांव वाले हमसे बातचीत में दावा करैं, ” दी.”
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जवइनियां से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर बिलौटी गाँव में आरा-बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक सरकारी स्कूल है. इसके सामने भरत का निर्माणाधीन एक य मकान है.
यहां उनके माता-पिता से मिलने लगभग हज़ारों की संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण, मीडियाकर्मी और विभिन्न दलों के नेताओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है.
घर के बरामदे में भरत के 70 min तिवारी भीड़ से घिरे रहने के बावजूद बेटे की मौत के सदमे से बेसुध दिखते हैं.
वहीं, भरत की मां 57 वर्षीय आशा देवी घर के एक कमरे में गाँव और रिश्तेदारी की महिलाओं के “पुलिस ने मेरे सामने ही मेरे बेटे को गोली मार दी, ऐसे तो किसी उग्रवादी को भी नहीं मारा जाता है. मेरा बेटा समाजसेवक था पुलिस ने उसे क्यों मार. डाला?”

35 min वसंत तिवारी अपने छोटे भाई के साथ आँखों में आंसू भरे चुपचाप अपनी माँ और पिताजी को देक हैं.
वसंत तिवारी अपने भाई को याद करते हैं कि भरत उनके चारों भाई-बहनों में सबसे प्रतिभाशाली थे. उन्होंने आरा कॉलेज से बीएससी तक पढ़ाई की थी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे थे.
“उन्होंने बताया,” न करने का फ़ैसला लिया था शादी के लिए कोई. मजबूर न करे, इसके लिए भरत ने करीब 10 min अपनी मर्ज़ी से ख़ुद का पिंडदान किया था और “”
“ग्रामीण विनय कुमार कहते हैं,” सभी धाराओं में बहने वाला जवान ख़ून था. उत्साही ज़रूर था लेकिन बात सही बोलता था और “”
More information?
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वैसे भरत भूषण का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था January 24, 2025 ने उन पर एक एफ़आईआर दर्ज कराई थी.
“इस एफ़आईआर के मुताबिक,” काग़ज़ात मांगे जाने पर भरत भूषण तिवारी ने मौजूद दारोगा रामाशंकर बैठा का कॉलर पकड़ “”
प्राथमिकी में दो सिपाहियों के घायल होने का भी उल्लेख किया गया है.
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के अलावा एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया गया था.
भरत तिवाीय वाले पोस्ट किया करते थे और कई पोस्ट में उन्होंने जवइनियां गांव का मुद्दा उठाया था.
उन्होंने एक फ़ेसबुक पोस्ट करके सरकारी कामकाज के तरीक़े पर नाराज़गी जताई थी और एक अधिकारी का ‘एनकाउंटर’ करने की बात कही थी.
उनका यह पोस्ट वायरल होने के बादस्थानीय पुलिस उनके घर गई. पुलिस का दावा है कि उन्होंने भरत तिवारी को समझाने की कन्होंने (भरत ने) पिस्टल निकाल ली.
16 जून की रात से लेकर 17 जून की सुबह तक 10 लाइव किए. जिसमें पुलिस द्वारा उनके घर को घेरने, भरत द्वारा पुलिस पर पिस्टल लहराने और कथित एनकाउंटर वाले वीडियो शामिल हैं.
More than 6,000 people 16 years old तक दो लाख 49 हज़ार हो गई.
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भरत तिवारी के फ़ेसबुक पेज पर भगत सिंह और महात्मा गाँधी समेत नेल्सन मंडेला के संदेश और उनकी जीवनी वाले वीडियो दिखाई दे रहे हैं.
वो खुद को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ का फ़ैन और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से प्रभावित बताते हैं.
More information वीडियो शेयर करते थे.
Year 2023 तक पैदल यात्रा कर चुके थे. इस यात्रा के दौरान उनके कई वीडियो और फ़ोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. यहां उनकी मुलाक़ात धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से हुई.
What’s wrong with you?
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ग्रामीण विनय कुमार ने बताया कि शाहपुर प्रखंड का जवइनियां गाँव, पिच भयंकर कटाव और बाढ़ के कारण गंगा नदी में 2 हो गया था.
More than €350 more than 350 plus $1500 per month. 70 ग्रामीणों को बिहार सरकार ने शाहपुर में रहने के लिए ज़मीन दी.
ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी ने पुनर्वास का मुद्दा सोशल मीडिया पर ज़ोर-शोर से उठाया और वे इसी वजह से भरत के साथ बेहद जुड़ाव महसूस करते हैं.
गाँव वालों का कहना है कि इसी गाँव के मुहाने पर भरत का ‘एनकाउंटर’ किया गया.
” सरकार ने हमारे साथ धोखा किया, हमको पानी से निकालकर पानी में ही डाल दिया है यहां से ख . इलाका भी डूब जाता है बाढ़ आने या जलजमाव होने. पर तो लोगों के घरों में पानी घुस जाएगा, छोटे-छोटे बच्चे हैं, डूबने की भी आशंका रहती है भरत इसी गड्ढे को भरने की मांग लगातार कर. “”
ग्रामीणों के इस आरोप पर भोजपुर के ज़िलाधिकारी तनय सुल्तानिया से फ़ोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन अभी उनका जवाब नहीं मिल पाया है. जवाब आते ही इस रिपोर्ट में उसे शामिल किया जाएगा.
“यही तो दुर्भाग्य है कि ज़िन्दे हुए उसका साथ किसी ने नहीं दिया वो बेचारा अकेले ही लड़ता रहा. प्रशासन से.”
What’s wrong with you?
‘एनकाउंटर’ के मामले ने तूल पकड़ा तब घटना के तीन दिन बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना अध्यक्ष समेत पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित किया.
साथ ही, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के रिटायर जज के द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया.
भरत तिवारी एनकाउंटर 22 min सुधांशु कुमार ने इसे पुलिस की लापरवाही माना है.
“उन्होंने कहा,” पुलिस वाले उससे बात करने गए, वह उसे ठीक से हैंडल नहीं आाए.”
इस मामले में शाहपुर थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और एक नाबालिग भाई पर प्रथामिकी दर्ज की, उन पर भरत को संरक्षण देने और अवैध हथियार की जानकारी का आरोप लगाया गया.
एफ़आईआर में दावा किया गया था कि भरत के सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ कई वीडियो पहले से वायरल हो चुके थे. बावजूद परिवार ने पुलिस को सूचना नहीं दी, जिससे यह प्रतीत होता है कि दोनों भरत को अवैध हथियार रखने में संरक्षण दे रहे थे.
बाद में मीडिया में ऐसी ख़बरें आईं कि ये एफ़आईआर वापस ले ली गई है. इस पर भरत भूषण तिवारी के बड़े भाई वसंत “तिवारी का कहना है,” मिले हैं.”
इस बारे में बीबीसी न्यूज़ हिन्दी की टीम ने भोजपुर एसपी राज और ज़िलाधिकारी तनय सुल्तानिया से कई बार फ़ोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई, उनका जवाब आने पर इस रिपोर्ट में उसे जोड़ा जाएगा.
वसंत तिवारी मांग करते हैं कि अगर केस से नाम हटा दिया गया है, तो लिखित प्रमाण दिया जाए. साथ ही उन्होंने इस मामले की जाँच सेवानिवृत्त न्यायाधीश से नहीं बल्कि वर्तमान जज से कराए जाने की मांग की है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

